

Anand Mining High Court Case : जबलपुर में आयरन ओर खदानों से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने आनंद माइनिंग की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह अपना पक्ष जबलपुर कलेक्टर के समक्ष रखे। साथ ही कलेक्टर को प्रमाणित आदेश की प्रति मिलने के चार महीने के भीतर पूरे प्रकरण का निराकरण करने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला सिहोरा तहसील की टिकरिया और प्रतापपुर स्थित दो आयरन ओर खदानों से जुड़ा है। आरोप है कि आनंद माइनिंग ने वर्ष 2004 से 2017 के बीच स्वीकृत क्षमता से अधिक खनन किया। इसी मामले में जांच के बाद कंपनी से वसूली की कार्रवाई प्रस्तावित की गई है।
मध्यप्रदेश सरकार ने इस मामले में 23 अप्रैल 2025 को जांच समिति का गठन किया था। समिति की रिपोर्ट के आधार पर जबलपुर कलेक्टर ने नवंबर 2025 में कार्रवाई शुरू की। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक टिकरिया खदान से 113 करोड़ 81 लाख 94 हजार 280 रुपये और प्रतापपुर खदान से 120 करोड़ 69 लाख 41 हजार 910 रुपये की वसूली प्रस्तावित की गई।
जांच रिपोर्ट में तीन संबंधित कंपनियों के मामलों में कुल 443 करोड़ 4 लाख 86 हजार 890 रुपये की वसूली का उल्लेख किया गया है। इसके साथ जीएसटी की देनदारी का भी जिक्र है। यह मामला विधानसभा में भी उठ चुका है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक जांच के बाद वसूली की कार्रवाई अभी लंबित है।
आनंद माइनिंग ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि जांच समिति के गठन का वैधानिक आधार स्पष्ट नहीं है। कंपनी ने कलेक्टर के अधिकार क्षेत्र, जांच में इस्तेमाल दस्तावेजों और गणना की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए थे। हालांकि हाईकोर्ट ने इन दलीलों पर कंपनी की वास्तविक देनदारी को लेकर कोई अंतिम राय नहीं दी है।
हाईकोर्ट ने कहा कि मामला अभी कलेक्टर के समक्ष विचाराधीन है और कंपनी को अपना पक्ष रखने के पर्याप्त अवसर मिले हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच समिति की रिपोर्ट कलेक्टर के लिए बाध्यकारी नहीं है। कलेक्टर उपलब्ध रिकॉर्ड और कंपनी की आपत्तियों पर स्वतंत्र रूप से फैसला करेंगे।
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि प्रमाणित आदेश की प्रति मिलने के चार महीने के भीतर कलेक्टर इस प्रकरण का निराकरण करें। साथ ही जबलपुर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने कंपनी की वास्तविक देनदारी पर कोई राय नहीं दी है। अब 443 करोड़ रुपये से अधिक की प्रस्तावित वसूली को लेकर अंतिम प्रशासनिक फैसला जबलपुर कलेक्टर के स्तर पर होना है।