MP के सबसे लंबे फ्लाईओवर का गिरने लगा प्लास्टर, बाल-बाल बची राहगीरों की जान, PWD ने शुरू की जांच
Jabalpur Flyover Plaster Falling: मध्य प्रदेश के सबसे लंबे फ्लाईओवर की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। फ्लाईओवर का प्लास्टर गिरने से राहगीरों पर खतरा मंडरा रहा है। PWD ने जांच की बात कही है।
- Written By: प्रीतेश जैन
फ्लाईओवर और उसका गिरता हुआ प्लास्टर (फोटो सोर्स- नवभारत)
MP Largest Flyover Controversy: जबलपुर में मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा फ्लाईओवर बनाया गया है, लेकिन इसके निर्माण की शुरुआत से शुरू हुई कॉन्ट्रोवर्सी थमने का नाम नहीं ले रही है। ताजा मामला फ्लाई ओवर के केबल स्टे ब्रिज वाले हिस्से में सीलिंग से प्लास्टर गिरने का है, जिसके बाद एक बार फिर फ्लाईओवर के निर्माण की गुणवत्ता को लेकर फिर सवाल उठने लगे हैं।
सोशल मीडिया में वायरल हुए वीडियो में मदन महल रेलवे स्टेशन के पास फ्लाईओवर के नीचे के हिस्से से प्लास्टर गिरने की तस्वीरें सामने आई हैं। इन तस्वीरों में सड़क पर बिखरा प्लास्टर का हिस्सा और कंक्रीट नजर आ रही है।
वीडियो वायरल होते ही एक्शन में PWD
वीडियो वायरल होते ही PWD विभाग एक्शन मोड में आ गया। आनन फानन में सड़क पर बिखरे प्लास्टर को हटवाया गया और ब्रिज की जांच शुरू की गई। इस मामले को लेकर PWD इंजीनियर प्रमेश कोरी ने सफाई दी है। उनका कहना है कि फ्लाईओवर के ब्लॉक्स के बीच में एक्सपेंशन ज्वॉइंट होता है। निर्माण के दौरान ब्लॉक्स के सेट होने के बाद जब प्लेट्स हटाई जाती हैं तो कुछ जगहों पर SLURY चिपकी रह जाती है, जो ब्रिज पर वाहनों के गुजरने के दौरान कंपन के कारण गिरने लगती है, हालांकि ऐसा बहुत कम होता है। बहरहाल ब्रिज का निरीक्षण करके जहां भी SLURY की सफाई नहीं हो पाई है उसे हटाने का काम करवाया जा रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी घटना ना हो।
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राहगीरों के लिए खतरा
ये गनीमत रही कि जब प्लास्टर गिरा उस वक्त भीड़ कम थी और कोई राहगीर या वाहन इसकी चपेट में नहीं आया नहीं तो कोई गंभीर हादसा हो सकता था। सड़क पर जगह-जगह गिरा मलबा फ्लाईओवर का प्लास्टर गिरने की गवाही दे रहा है। इस मलबे की चपेट में आने से वाहन भी दुर्घटनाग्रस्त हो सकते हैं।
फ्लाईओवर और कॉन्ट्रोवर्सी
साल 2018 से शुरू हुआ फ्लाईओवर निर्माण कार्य तीन साल में पूरा होना था, लेकिन इसे बनाने में करीब 6 साल का वक्त लगा। 23 अगस्त 2025 को केंद्रीय सड़क एवं राजमार्ग परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, मुख्यमंत्री मोहन यादव और लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह की मौजूदगी में इसका लोकार्पण किया गया। फ्लाईओवर निर्माण के बाद कई महीनों तक रीलबाज और गंदगी फैलाने वालों के कारण फ्लाईओवर सुर्खियों में रहा, फिर सड़क हादसे और फ्लाईओवर पर बनाए गए साइन बोर्ड को लेकर विवाद खड़े हुए। बहरहाल एक बार फिर फ्लाईओवर का प्लास्टर गिरने की घटना के बाद लोगों में तरह तरह की चर्चाएं हैं।
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खामियों के साथ साथ खूबियां रहीं चर्चा में
यह फ्लाईओवर जहां गुणवत्ता की खामियों को लेकर चर्चा में रहा वहीं इसकी कई खासियतें भी हैं, जिनकी वजह से यह देशभर में अपनी अलग पहचान रखता है।
- फ्लाईओवर की कुल लंबाई 6.855 KM है
- जबलपुर शहर का यह फ्लाईओवर वर्तमान में मध्यप्रदेश का सबसे लम्बा (6.855 कि.मी.) फ्लाईओवर है
- फ्लाईओवर निर्माण की कुल लागत 1100 करोड़ रुपए है
- लगभग 7 सालों में बनकर तैयार हुआ
- ब्रिज के नीचे 50 हजार पौधे लगाए गए, गार्डन और बास्केट बॉल कोर्ट भी बनाया गया
- मदन महल से दमोहनाका और महानद्दा से LIC तक T शेप में निर्माण हुआ
- इस फ्लाईओवर में 2 एलिवेटेड रोटरी (रानीताल चौक और दशमेश द्वार पर) हैं। इस तरह का ये भारत का पहला फ्लाईओवर है
- मदन महल रेलवे स्टेशन के ऊपर केबल स्टे ब्रिज बनाया गया
- केबल स्टे ब्रिज में एक्स्ट्रा डोस केबल स्टे ब्रिज का सेंट्रल स्पान 193.5 मीटर लंबा है, जो कि रेलवे ट्रैक एवं स्टेशन के ऊपर से गुजरने वाला भारत का सबसे लंबा सिंगल स्पान है
- इस फ्लाईओवर के निर्माण कार्य हेतु भारत सरकार से सी.आर. आई. एफ. निधि अंतर्गत भारत की सबसे बड़ी राशि 758.54 करोड़ की स्वीकृति प्राप्त हुई थी
