

Jabalpur Fake Kidnapping Complaint: जबलपुर में पुलिस को गुमराह करने का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। युवती के अपहरण की जिस शिकायत को गंभीर मानते हुए पुलिस ने जांच शुरू की थी वह मामला फर्जी निकला और अब पुलिस झूठी शिकायत करने की जांच में जुटी है।
दरअसल यह पूरा मामला प्रदेश के डीजीपी के संज्ञान लेने के बाद चर्चा में आ गया। गोरखपुर थाना क्षेत्र में रहने वाली एक महिला अपनी नाबालिग बेटी के साथ एसपी कार्यालय पहुंची थी। दोनों ने आरोप लगाया था कि विकास केवट और अर्जुन पासी नामक युवक उनकी बड़ी बेटी का अपहरण करके अपने साथ में ले गए हैं। इसके बाद से उनकी नाबालिग बेटी को छेड़छाड़ करते हुए लगातार परेशान कर रहे हैं।
युवती के अपहरण की कहानी जबलपुर में चर्चा का विषय बन गई, इसे लेकर पुलिस की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए और खबरों के माध्यम से मामला डीजीपी कैलाश मकवाना तक पहुंचा, जिसके बाद उन्होंने जबलपुर एसपी को इसकी तत्काल जांच कर युवती को छुड़ाने और आरोपियों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
जबलपुर पुलिस ने जब इस घटना की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की तो पूरी कहानी ही बदल गई। पुलिस की पड़ताल में सामने आया कि शिकायत दर्ज कराने से पहले ही महिला की बड़ी बेटी अपनी मर्जी से विकास केवट नाम के युवक के साथ घर छोड़कर जा चुकी थी। दोनों के बीच प्रेम संबंध थे और युवती अपनी इच्छा से उसके साथ रह रही थी।
पुलिस जांच में यह भी पता चला कि बड़ी बेटी के घर से चले जाने से नाराज होकर मां और उसकी नाबालिग बेटी ने एसपी कार्यालय पहुंचकर विकास केवट के साथियों के खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज कराई। यानी जिन लोगों पर धमकाने और परेशान करने के आरोप लगाए गए थे, वे जांच में सही नहीं पाए गए। एसपी कार्यालय की जांच के बाद स्पष्ट हुआ कि शिकायत तथ्यों पर आधारित नहीं थी और पुलिस को गुमराह करने का प्रयास किया गया।
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अब इस मामले ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि झूठी शिकायतों के कारण पुलिस का समय और संसाधन व्यर्थ होते हैं, जिसके कारण कई बार वास्तविक पीड़ितों के मामलों की जांच भी प्रभावित होती है। वहीं कई छोटे छोटे मामले जो आपसी तालमेल और सामंजस्य से सुलझ सकते हैं उन्हें भी थानों तक जबरन लाया जाता है।