

Jabalpur CNG Garbage Vehicles: नगर निगम ने ग्रीन इंडिया अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अपने स्वास्थ्य विभाग के बेड़े में 40 नए CNG टिप्पर वाहनों को शामिल किया है।
महापौर और नगर निगम के अधिकारियों ने हरी झंडी दिखाकर इन वाहनों को शहर के अलग-अलग क्षेत्रों के लिए रवाना किया। इस दौरान महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू और नगर निगम अध्यक्ष रिंकुज विज ने खुद भी टिप्पर चलाकर सफाई कर्मचारियों का हौसला बढ़ाया। नगर निगम का यह नवाचार सिर्फ 40 वाहनों तक सीमित नहीं है। आने वाले करीब 6 महीनों में लगभग 100 और वाहनों को डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन व्यवस्था में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
यानी आने वाले समय में शहर में कचरा उठाने वाले वाहनों का बड़ा हिस्सा पारंपरिक पेट्रोल-डीजल से हटाकर सीएनजी आधारित किया जाएगा। नगर निगम की इस पहल के पीछे दो बड़े उद्देश्य बताए जा रहे हैं—पहला, शहर की सफाई व्यवस्था को और मजबूत करना और दूसरा, कचरा परिवहन के दौरान होने वाले वायु प्रदूषण को कम करना।
दरअसल जबलपुर नगर निगम लंबे समय से डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन व्यवस्था संचालित कर रहा है। मध्यप्रदेश विधानसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक नगर निगम जबलपुर स्वयं कचरा संग्रहण और परिवहन का काम कर रहा है। वर्ष 2024 के विधानसभा रिकॉर्ड में निगम के पास 459 टिपर, 154 टायरसाइकिल रिक्शा और 102 हैंडकार्ट का उल्लेख भी मिलता है। अब इसी व्यवस्था को सीएनजी वाहनों के जरिए ज्यादा पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है।
नगर निगम की 40 सीएनजी हॉपर टिपर वाहनों की खरीद प्रक्रिया के रिकॉर्ड में इन वाहनों के लिए बीएस-6 मानक, सीएनजी इंजन, करीब 3 घन मीटर या उससे अधिक कचरा क्षमता और लगभग 1 टन या उससे अधिक पेलोड जैसी तकनीकी आवश्यकताएं निर्धारित की गई हैं। इसका मतलब साफ है, शहर में कचरा उठाने वाली गाड़ियों का बेड़ा सिर्फ बढ़ाया नहीं जा रहा, बल्कि उसे ज्यादा पर्यावरण-अनुकूल बनाने की कोशिश भी की जा रही है।
अगर अगले छह महीनों में प्रस्तावित करीब 100 अतिरिक्त वाहन भी व्यवस्था में शामिल हो जाते हैं, तो डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन की क्षमता में बड़ा इजाफा हो सकता है इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग के खर्च में कटौती भी हो सकती है। अब देखना होगा कि सीएनजी वाहनों के संचालन के साथ शहर में कचरा संग्रहण की नियमितता, ईंधन लागत, वाहन संचालन और प्रदूषण में कितनी वास्तविक कमी आती है। फिलहाल नगर निगम की इस पहल को स्वच्छता के साथ पर्यावरण संरक्षण को जोड़ने वाला अहम कदम माना जा रहा है।