

Bhedaghat Narmada Mahotsav Richa Sharma Performance : जबलपुर में भेड़ाघाट की संगमरमरी वादियों में आयोजित दो दिवसीय नर्मदा महोत्सव का रविवार को समापन हो गया। महोत्सव की अंतिम शाम इंडियन आइडल फेम अरुणिता कांजीलाल और मशहूर पार्श्व गायिका ऋचा शर्मा की शानदार प्रस्तुतियों के नाम रही।
महाराष्ट्र के कलाकारों की ढोल-ताशा प्रस्तुति ने दर्शकों में उत्साह भर दिया। शरद पूर्णिमा की चांदनी में नर्मदा तट का प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने आयोजन को यादगार बना दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत मां नर्मदा के पूजन के साथ हुई। इसके बाद जबलपुर की त्रिभंग कला अकादमी की कलाकार कौतुकी उपाध्याय ने कथक शैली में शिव स्तुति प्रस्तुत की। उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों को शास्त्रीय नृत्य की सुंदरता से रूबरू कराया। इसके बाद महाराष्ट्र की शिवमुद्रा संस्था के कलाकारों ने पारंपरिक ढोल-ताशा वादन किया। ऊर्जावान प्रस्तुति पर दर्शकों ने उत्साह के साथ कलाकारों का स्वागत किया।
महोत्सव की प्रमुख आकर्षण इंडियन आइडल सीजन-12 की प्रथम उपविजेता अरुणिता कांजीलाल रहीं। उन्होंने 'अई गिरि नंदिनी' स्तोत्र से गायन की शुरुआत की। इसके बाद 'राम सियाराम', 'एक राधा एक मीरा', 'हीरे मोती मैं न चाहूं' और 'सत्यम शिवम सुंदरम' जैसे गीतों की प्रस्तुति दी। मां नर्मदा को समर्पित भजन 'मां रेवा थारो पानी निर्मल' ने सांस्कृतिक संध्या में भक्तिमय माहौल बना दिया।
सांस्कृतिक संध्या की अंतिम प्रस्तुति मशहूर पार्श्व गायिका ऋचा शर्मा ने दी। उन्होंने 'सोनिया वे रांझणा वे', 'जिंदगी में कभी कोई आए न रब्बा' और 'माही वे' जैसे लोकप्रिय गीत सुनाए। उनकी दमदार आवाज और गायकी ने दर्शकों को खूब आकर्षित किया। गीतों के दौरान श्रोताओं ने तालियां बजाकर कलाकार का उत्साह बढ़ाया।
हर साल शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होने वाले नर्मदा महोत्सव में शामिल होने के लिए दूर-दूर से पर्यटक भेड़ाघाट पहुंचते हैं। इस बार भी संगमरमरी चट्टानों के बीच नर्मदा तट की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने लोगों का ध्यान खींचा। शास्त्रीय नृत्य, भजन, फिल्मी गीत और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के संगम ने महोत्सव की शाम को खास बनाया।
समापन समारोह में राज्यसभा सांसद सुमित्रा वाल्मीकि मुख्य अतिथि रहीं, जबकि विधायक नीरज सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह भी वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने नर्मदा महोत्सव को प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक बताया। साथ ही आयोजन को और भव्य बनाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयास जारी रखने की बात कही। महोत्सव ने एक बार फिर भेड़ाघाट की सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन की संभावनाओं को सामने रखा।