

Bageshwar Dham Minor Rape Case : बागेश्वर धाम में मार्च 2026 में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। वहीं आरोपी राजू जाटव की दूसरी जमानत याचिका भी खारिज कर दी गई है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच में जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की सिंगल बेंच ने मामले की सुनवाई की और छतरपुर एसपी को विशेष जांच टीम यानी SIT गठित करने के निर्देश दिए हैं।
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपी राजू जाटव के DNA का मिलान नाबालिग के गर्भ से मिले भ्रूण से नहीं हुआ। वहीं ट्रायल के दौरान नाबालिग अपने पहले के बयान से भी अलग बात कह चुकी है।
जानकारी के मुताबिक 16 वर्षीय नाबालिग 15 मार्च को घर से भागकर बागेश्वर धाम पहुंची थी। दो दिन बाद उसकी मुलाकात आरोपी राजू जाटव से हुई। इस दौरान राजू उसे अपने साथ ले गया और करीब 15 दिनों तक अपने पास रखा। बाद में पुलिस ने उसकी पत्नी की निशानदेही पर नाबालिग को बरामद किया। जांच के दौरान नाबालिग के करीब दो महीने की गर्भवती होने की जानकारी सामने आई। चूंकि मामला नाबालिग से जुड़ा था, इसलिए उसका गर्भपात करवाते हुए भ्रूण और प्लेसेंटा को फोरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित रखा गया। इसके बाद आई DNA रिपोर्ट में राजू जाटव को भ्रूण का जैविक पिता नहीं पाया गया।
हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार तमाम परिस्थितियों, गवाहों और साक्ष्यों को देखते हुए SIT को दो महीने के भीतर पूरे मामले की जांच करनी होगी। टीम यह पता लगाएगी कि नाबालिग के साथ यौन अपराध का पूरा घटनाक्रम क्या था और उसके गर्भ से मिले भ्रूण का जैविक पिता कौन है। DNA रिपोर्ट और ट्रायल के दौरान सामने आए तथ्यों को भी जांच के दायरे में रखा जाएगा।
मामले की जांच के दौरान यह भी सामने आया कि ट्रायल के दौरान नाबालिग अपने पहले के बयान से अलग बात कह चुकी है। आरोपी के DNA का भ्रूण से मिलान नहीं होने और बयान में बदलाव के बाद हाईकोर्ट ने जांच का दायरा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। अब SIT मामले से जुड़े गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट करेगी।
इसके पहले बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री महिलाओं और बच्चियों से अकेले आश्रम न आने की अपील कर चुके हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं को सतर्क करते हुए कहा था कि कोई भी महिला अपने परिवार के बिना उनके आश्रम न आए और यदि आना भी पड़े तो वहां किसी भी सेवादार या पुरुष पर भरोसा न करें। उन्होंने कहा था कि आश्रम परिसर 5 किलोमीटर के दायरे में फैला है, ऐसे में पूरे क्षेत्र की सुरक्षा उनके लिए आसान नहीं है।