Highlights :
RSS की समीक्षा बैठक में संगठन के कार्य विस्तार और आगामी योजनाओं पर चर्चा।
10 करोड़ से अधिक घरों तक संपर्क करने का दावा।
देशभर में 99,423 शाखाएं संचालित होने की जानकारी।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 94,248 हिंदू सम्मेलन आयोजित हुए।
सम्मेलनों में करीब 5 करोड़ लोगों के शामिल होने का दावा।
RSS review meeting latest updates : इंदौर में RSS की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक खत्म होने से पहले सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा संघ ने देशभर में समाज के सज्जन व्यक्तियों से संपर्क करने, उन्हें संगठन की गतिविधियों से जोड़ने और संघ के लिए मिल रहे सहयोग की समीक्षा करने का काम किया है। इसके साथ ही आपदा राहत, शाखाओं के विस्तार और युवाओं के बीच संवाद जैसे विषयों पर भी जानकारी साझा की गई।
होसबाले ने बताया कि देश के अलग अलग हिस्सों में आई प्राकृतिक आपदाओं के दौरान संघ के स्वयंसेवकों ने सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर राहत कार्य किए। असम में मई जून के दौरान आई बाढ़ से 805 गांवों के करीब 67 हजार परिवार प्रभावित हुए थे। इस दौरान 1600 से अधिक स्वयंसेवकों ने 42 हजार परिवारों तक दवाइयां और राशन पहुंचाया। वहीं ओडिशा और आंध्र प्रदेश में आए चक्रवात के दौरान बिजली के खंभे लगवाने के साथ भोजन और पानी की व्यवस्था में भी स्वयंसेवकों ने सहयोग किया।
संघ की ओर से बताया गया कि कार्य विस्तार के लिए नए गांवों और बस्तियों में एक सप्ताह से 10 दिन तक शाखाएं लगाने के प्रयास किए गए। बैठक में साझा आंकड़ों के मुताबिक 63208 स्थानों पर शाखाएं संचालित हो रही हैं। इनमें करीब 8 हजार नए स्थान जुड़े हैं। कुल शाखाओं की संख्या 99 423 बताई गई जिनमें 12 हजार से अधिक नई शाखाएं शुरू हुई हैं। इसके अलावा 14 096 स्थानों पर मासिक मिलन आयोजित किए जा रहे हैं। संघ का दावा है कि 10 करोड़ से अधिक घरों तक संपर्क कर संगठन की जानकारी पहुंचाई गई है।
संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों के तहत पंच परिवर्तन को लेकर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सम्मेलन आयोजित किए गए। पीसी में बताया गया कि ग्रामीण इलाकों में 65664 और शहरी बस्तियों में 28584 हिंदू सम्मेलन हुए। इन आयोजनों में करीब 5 करोड़ लोगों की भागीदारी का दावा किया गया। अरुणाचल प्रदेश, लद्दाख और पोर्ट ब्लेयर में भी कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें 13 छोटे द्वीपों से भी लोगों ने हिस्सा लिया।
युवाओं को संगठन और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने के लिए 21237 स्थानों पर संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए। पीसी में बताया गया कि युवाओं के बीच कुल 57 हजार कार्यक्रम हुए। आने वाले समय में युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को लेकर भी काम करने की योजना है। संघ इस विषय पर सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर जागरूकता अभियान चलाने, नशे की लत से प्रभावित लोगों की काउंसलिंग कराने और समाज में इसके दुष्परिणामों को लेकर जागरूकता बढ़ाने की दिशा में काम करेगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में संघ की नई संगठनात्मक रचना को लेकर भी जानकारी दी गई। इसके तहत पहले मौजूद 46 प्रांतों की व्यवस्था में बदलाव करते हुए 88 संभाग बनाए जाने की बात कही गई। इस बदलाव को संगठन के कार्य विस्तार और प्रशासनिक व्यवस्था से जोड़कर देखा जा रहा है।
बच्चों और युवाओं तक पहुंच रहे आपत्तिजनक डिजिटल कंटेंट से जुड़े सवाल पर संघ की ओर से पीसी में कहा गया कि तकनीक को पूरी तरह रोकना आसान नहीं है। कुछ देशों में 13 वर्ष तक के बच्चों के लिए नियम बनाए गए हैं और भारत में भी इस तरह की मांग उठती रही है। संघ का मानना है कि सरकार इस विषय पर निर्णय ले सकती है लेकिन केवल कानून के जरिए समस्या का समाधान संभव नहीं है। बच्चों को घर और विद्यालय में संस्कार देना उनके सामने बड़ों का अच्छा उदाहरण रखना और मोबाइल या अन्य डिजिटल डिवाइस के इस्तेमाल की उम्र व समय तय करना जरूरी है। परिवार के सदस्यों के साथ बैठकर सकारात्मक विषयों पर चर्चा करने और मंदिरों में बच्चों के लिए विशेष गतिविधियां आयोजित करने पर भी जोर दिया गया।
देश में लोकतंत्र और युवाओं के आंदोलनों को लेकर पूछे गए सवाल पर संघ की ओर से कहा गया कि युवाओं की आकांक्षाओं और समस्याओं को समझना जरूरी है। किसी युवा का मुद्दा उठाना अपने आप में विरोध नहीं है। संघ ने हिंसा और अराजकता का विरोध करते हुए कहा कि युवाओं से संवाद होना चाहिए और उनकी प्रतिभा, कौशल तथा सेवा भावना को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाना चाहिए। बैठक में ये भी कहा गया कि समाज की समस्याओं का समाधान करना जरूरी है और अच्छे विचार रखने वाले लोगों को निष्क्रिय नहीं रहना चाहिए।
इंदौर शहर में आरक्षण की समीक्षा को लेकर पूछे गए सवाल पर संघ की ओर से कहा गया कि जिन लोगों के साथ सामाजिक कारणों से भेदभाव हुआ है उनके साथ समानता का भाव स्थापित होने तक आरक्षण जारी रहना चाहिए। जब तक प्रभावित वर्गों के मन में ये विश्वास नहीं आता कि उन्हें समाज में समान स्थान मिल रहा है, तब तक आरक्षण सामाजिक रूप से जरूरी है। इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
संघ के पंजीयन और हिंदू ,हिंदुत्व को अलग अलग बताए जाने के सवाल पर कहा गया कि हिंदू और हिंदुत्व को अलग अलग नहीं देखा जा सकता। हिंदू है तो हिंदुत्व है और हिंदुत्व हिंदू की पहचान है। संघ की ओर से ये भी कहा गया कि संगठन के पंजीयन के लिए कोई अनिवार्य कानून नहीं है। संघ स्वयं को समाज से अलग संगठन नहीं मानता और संविधान के अनुसार काम करने की बात कहता है। तमिलनाडु में संचलन की अनुमति नहीं मिलने पर कोर्ट से अनुमति लेने का उदाहरण भी दिया गया।
संघ के स्वयंसेवक दुनिया के कई देशों में है। वहां वो उन देशों के कानून के हिसाब संघ का काम कर रहे है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत की सीमा के अंदर ही काम करता है। आमंत्रण मिला इसलिए संघ गया, कई बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संघ को लेकर बाते होती है इसलिए कई बार हम बाहर वहाँ के लोगों को समझाने जाते है। महिलाओं के संदर्भ में हमने कहा कि सहज रूप से हमारी चर्चा होती है। महिला समन्वय पर भी काम चलता है। महिलाओं को जोड़कर ही हम काम करते है। पश्चिम बंगाल में डेढ़ सौ गुना हमारी शाखाएं बढ़ी है। अब वहां परिस्थिति बदली है।
राजनीतिक पार्टियों को अपने अपने एजेंडा से विरोध करना होता है। मतदाता सूची का पुनरीक्षण करना एसआइआर का काम है। मुझे नोटिस आया, मैने अपने गांव में कभी वोट नहीं किया,मेरा नाम हमेशा से वहा आया, मैने हमेशा बैंगलोर में मतदान किया।