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इंदौर के विजय नगर में स्थित श्री ग्वाल भैरव कालका माता मंदिर करीब 100 साल पुराना बताया जाता है।
मंदिर में विवाह में देरी होने पर 21 हल्दी की गांठें चढ़ाने की मान्यता है।
संतान सुख और शारीरिक परेशानियों से मुक्ति की कामना लेकर भी श्रद्धालु माता के दरबार में पहुंचते हैं।
मंदिर में नींबू की माला चढ़ाने की विशेष परंपरा बताई जाती है।
नवरात्रि के दौरान मंदिर में होती है विशेष पूजा-अर्चना।
Indore : इंदौर शहर के विजय नगर क्षेत्र में स्थित श्री ग्वाल भैरव कालका माता मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। करीब 100 साल से प्रतिष्ठित इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां सच्चे मन से प्रार्थना करने वाले भक्तों को माता रानी का आशीर्वाद मिलता है।
मंदिर में विवाह संबंधी अड़चनों, संतान सुख और अन्य मनोकामनाओं के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंचते हैं।
मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार मनोकामना पूरी होने की इच्छा रखने वाले भक्त माता रानी को नींबू की माला अर्पित करते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि माता सभी के दुख दूर करती हैं। आगम तंत्र पर आधारित बताए जाने वाले इस मंदिर का प्रत्येक कोण विशेष धार्मिक महत्व रखता है। मंदिर से करीब 100 मीटर की दूरी पर मुक्तिधाम स्थित है। इसके बावजूद यहां स्थापित काली माता की प्रतिमा को भक्त ममता और करुणा से परिपूर्ण मानते हैं।
इंदौर शहर के इस मंदिर में विवाह में देरी और अड़चनों से परेशान श्रद्धालु विशेष पूजा के लिए पहुंचते हैं। यहां 21 हल्दी की गांठें अर्पित करने की परंपरा है। मान्यता है कि माता के आशीर्वाद से विवाह संबंधी परेशानियां दूर होती हैं। इसी विश्वास के चलते कई परिवार यहां पूजा-अर्चना करने आते हैं। हालांकि ये धार्मिक मान्यताएं हैं इनके परिणाम की कोई वैज्ञानिक गारंटी नहीं है।
मंदिर के पुजारी के अनुसार संतान सुख की कामना करने वाली महिलाएं मंगलवार और शनिवार को मंदिर में विशेष प्रार्थना करती हैं। इसके लिए सवा किलो चावल, दो नारियल, एक मीटर लाल कपड़ा और 250 ग्राम पताशा लाने की परंपरा बताई गई है। शारीरिक पीड़ा से मुक्ति की कामना करने वाले भक्त कच्चा दूध भी अर्पित करते हैं। ये पूजा सुबह 10 बजे से पहले करने की मान्यता है।
मंदिर में माता को मिष्ठान का भोग लगाने की परंपरा है। खीर, रबड़ी, मालपुआ और रस मलाई जैसे व्यंजन चढ़ाए जाते हैं। यहां प्याज-लहसुन रहित सात्विक भोजन को प्राथमिकता दी जाती है। सामान्य दिनों में मंदिर सुबह 6 बजे खुलता है और रात 11 बजे शयन आरती के बाद बंद होता है। नवरात्र पर्व के दौरान विशेष पूजा रात 12 बजे तक चलती है। इन परंपराओं के कारण कालका माता मंदिर इंदौर के श्रद्धालुओं के बीच विशेष स्थान रखता है।