Highlights :
दतिया के चूनगढ़ फाटक के पास पहाड़ी पर स्थित है मां राजराजेश्वरी का प्राचीन मंदिर।
मां काली के इस दरबार को लगभग 70 से 80 वर्ष पुराना बताया जाता है।
मंदिर का इतिहास दतिया रियासत और बुंदेलखंड की धार्मिक परंपराओं से जुड़ा है।
मंदिर में प्रत्येक शनिवार निःशुल्क दरबार लगने की परंपरा है।
Chunangarh Phatak Datia Temple : एमपी की धार्मिक नगरी दतिया में शारदीय नवरात्रि के अवसर पर देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है । मां पीतांबरा पीठ के लिए प्रसिद्ध इस शहर में चूनगढ़ फाटक के पास पहाड़ी पर स्थित मां काली का प्राचीन मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।
मां राजराजेश्वरी के नाम से प्रसिद्ध इस दरबार में नवरात्रि की सप्तमी पर माता का विशेष शृंगार किया गया और आरती के बाद भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया।
स्थानीय मान्यताओं और मंदिर के पुजारियों के अनुसार इस मंदिर की स्थापना स्वर्गीय मुन्नीलाल वाल्मीकि ने कराई थी। बताया जाता है कि वह दतिया रियासत के राजा के यहां सिपाही थे। उन्होंने माता का मंदिर स्थापित करने का संकल्प लिया था जिसे सेवानिवृत्त होने के बाद पूरा किया। मंदिर लगभग 70 से 80 वर्ष पुराना बताया जाता है।
मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यता के अनुसार बुंदेला बाबा की प्रेरणा और दर्शन के बाद यहां मां काली की स्थापना की गई थी। पहाड़ी और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित यह मंदिर दतिया की ऐतिहासिक और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है। स्थानीय कथाओं में इस क्षेत्र का संबंध मुगल काल और बुंदेलखंड के संघर्षों से भी जोड़ा जाता है।
मंदिर के पुजारियों के अनुसार यहां विराजमान मां काली का स्वरूप वाममार्गी माना जाता है। धार्मिक परंपराओं में देवी के विभिन्न स्वरूपों और उपासना पद्धतियों का विशेष महत्व है। श्रद्धालु राहु, केतु और शनि की प्रतिकूल दशाओं के दौरान भी मां के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। इसे धार्मिक और ज्योतिषीय आस्था के रूप में देखा जाता है।
मां राजराजेश्वरी के दरबार में प्रत्येक शनिवार निःशुल्क दरबार आयोजित होने की परंपरा बताई जाती है। दतिया जिले सहित देश के विभिन्न शहरों से श्रद्धालु यहां पहुंचकर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। मंदिर की परंपरा के अनुसार मां के दर्शन के बाद बाबा बुंदेला सरकार के दर्शन करना भी विशेष महत्व रखता है।