

Highlights :
विवांता अमलतास होटल के उद्घाटन के बाद इंदौर में जमीन और निर्माण संबंधी अनुमतियों को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हुआ।
कांग्रेस ने 2007 के एमओयू, रोजगार के दावे और जमीन के बाद में हुए उपयोग पर सवाल उठाए।
कांग्रेस का आरोप है कि प्रस्तावित निर्माण नहीं होने के बाद जमीन पर श्रीराम एनक्लेव एमआर-10 कॉलोनी विकसित की गई।
भाजपा ने अनियमितता के आरोप खारिज करते हुए कहा कि परियोजना के लिए अनुमतियां नियमों के अनुसार दी गईं।
Indore Hotel Land Controversy : इंदौर के विवांता अमलतास होटल के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा उद्घाटन के बाद जमीन और निर्माण से जुड़ा मामला राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस ने इन्वेस्टर मीट के नाम पर जमीन आवंटित करने, निर्धारित शर्तों का पालन नहीं होने और बाद में जमीन पर कॉलोनी विकसित किए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, भाजपा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि परियोजना से संबंधित अनुमतियां नियमों के तहत दी गई हैं। होटल परियोजना से जुड़ी कंपनी ने भी दस्तावेजों के आधार पर जमीन के स्वामित्व और निर्माण संबंधी अनुमतियों का पक्ष रखा है।
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता नीलाभ शुक्ला ने आरोप लगाया कि वर्ष 2007 में इंदौर में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान गुड़गांव के कारोबारी अभिषेक मोदी के साथ मॉल निर्माण के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया था। कांग्रेस के मुताबिक, इस परियोजना के जरिए करीब 4,000 लोगों को रोजगार देने और विदेशी निवेश लाने का दावा किया गया था।
कांग्रेस का आरोप है कि कई वर्षों तक प्रस्तावित निर्माण शुरू नहीं हुआ। इसके बाद इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) ने संबंधित कारोबारी को निर्माण नहीं किए जाने के संबंध में नोटिस जारी किया। पार्टी ने दावा किया कि बाद में जमीन का डायवर्जन कराकर वहां श्रीराम एनक्लेव एमआर-10 नाम से कॉलोनी विकसित की गई। कांग्रेस ने इस पूरी प्रक्रिया में नगर निगम, आईडीए और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
होटल परियोजना से जुड़ी कंपनी जेकेएम इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों में जमीन के स्वामित्व, पुराने समझौते, विभागीय जांच, न्यायालयीन आदेश और निर्माण संबंधी अनुमतियों का उल्लेख किया गया है। कंपनी ने 12 नवंबर 2007 के समझौते का हवाला देते हुए संबंधित जमीन पर निजी स्वामित्व का दावा किया है।
दस्तावेजों में वर्ष 2012 में की गई शिकायतों, लोकायुक्त से संबंधित प्रकरण के निराकरण और 27 फरवरी 2018 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ द्वारा दिए गए आदेश का भी जिक्र है। कंपनी के अनुसार, वर्ष 2020 और 2021 में अलग-अलग उपयोगों के लिए स्थल अनुमोदन की स्वीकृतियां मिलीं। इसके अलावा भवन अनुज्ञा से संबंधित आवेदन और वर्ष 2023-24 में मिली अनुमतियों का भी उल्लेख किया गया है।
कंपनी का कहना है कि परियोजना के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं के तहत अनुमतियां प्राप्त की गईं और इसमें करोड़ों रुपये का निवेश किया गया है। कंपनी ने अपने पक्ष में जमीन से संबंधित दस्तावेजों, पुराने समझौते और विभिन्न विभागों की अनुमतियों का हवाला दिया है। हालांकि, इन दस्तावेजों और कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों के बीच विवाद बना हुआ है।
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राकेश यादव का कहना है कि परियोजना से संबंधित दस्तावेजों और अनुमतियों के आधार पर नियमों के अनुसार काम हुआ है। उन्होंने किसी भी तरह की अनियमितता के आरोपों को खारिज किया है। इस तरह एक ओर कांग्रेस जमीन आवंटन की शर्तों और उसके बाद हुए उपयोग को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा और कंपनी की ओर से प्रक्रिया को नियमानुसार बताया जा रहा है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा होटल के उद्घाटन के बाद यह मामला राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। जमीन आवंटन की मूल शर्तों, विभागीय अनुमतियों, नगर निगम के पंचनामे और उसके बाद हुई कार्रवाई से जुड़े तथ्यों की जांच इस विवाद के प्रमुख सवालों को स्पष्ट करने में अहम होगी। फिलहाल, कांग्रेस के आरोपों और भाजपा के जवाब के बीच मामले को लेकर राजनीतिक खींचतान जारी है।