इंदौर के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की दावों की खुली पोल, स्ट्रेचर खींचने को मजबूर हुए लाचार माता-पिता; VIDEO
Indore Viral Video: इंदौर के एमवाय अस्पताल से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने अस्पताल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल, भीषण गर्मी में बीमार बच्चे को स्ट्रेचर पर लिटाकर 1 किमी तक माता-पिता खींचते दिखे।
- Reported By: अंशुल मुकाती | Edited By: सजल रघुवंशी
इंदौर एमवाय अस्पताल वायरल वीडियो (सोर्स- सोशल मीडिया)
Indore MY Hospital Patient Negligence: इंदौर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में शामिल एमवाय अस्पताल और सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की व्यवस्थाएं एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई हैं। इलाज के लिए भर्ती एक बीमार बच्चे को अस्पताल के एक विभाग से दूसरे अस्पताल तक ले जाने के लिए उसके परिजनों को करीब एक किलोमीटर का सफर स्ट्रेचर खींचकर तय करना पड़ा।
भीषण गर्मी के बीच सामने आए इस दृश्य ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
गर्मी में स्ट्रेचर खींचते रहे पिता, बच्चे को संभालती रही मां
अस्पताल परिसर से सामने आई तस्वीरों में देखा जा सकता है कि बच्चे के पिता खुद स्ट्रेचर खींचते हुए एमवाय अस्पताल से सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की ओर जा रहे हैं। वहीं मां तेज धूप और गर्मी के बीच बच्चे को राहत पहुंचाने के लिए उसके सिर पर भीगी चुन्नी रखे हुए नजर आई। परिवार का कहना है कि बच्चे की तबीयत लंबे समय से खराब है और उसे लगातार इलाज की आवश्यकता है लेकिन अस्पताल प्रशासन की ओर से मरीज को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई गई।
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मध्य प्रदेश में लगातार एयर एंबुलेंस की बात होती है प्रचार होता है। लेकिन हालत ये है कि इंदौर में एम वाय अस्पताल से सुपर स्पेशलिटी अस्पताल 1 किमी तक माता-पिता अपने तड़पते बेटे को खुद स्ट्रेचर पर लेकर गए। और जिम्मेदारो का हर बार का जवाब दिखवा रहे हैं।
शर्म है कि इनको आती नहीं pic.twitter.com/YWfBV90eV5 — SanjayGupta_Journalist (@sanjaygupta1304) June 7, 2026
15 दिनों से भर्ती है बच्चा
परिजनों के मुताबिक बच्चा पिछले करीब 15 दिनों से अस्पताल में भर्ती है। इस दौरान उसे विभिन्न जांचों और उपचार के लिए कई बार अलग-अलग विभागों तथा अस्पतालों में भेजा गया। हर बार मरीज को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उनका आरोप है कि अस्पताल में मौजूद व्यवस्थाएं गंभीर मरीजों की जरूरतों के अनुरूप नहीं हैं, जिससे मरीज और उनके परिजन अतिरिक्त परेशानियों से गुजरने को मजबूर हो जाते हैं।
स्ट्रेचर और स्टाफ की कमी का आरोप
परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर स्ट्रेचर, व्हीलचेयर और सहायक कर्मचारियों की कमी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कई बार मदद मांगने के बावजूद मरीज को शिफ्ट करने के लिए कोई कर्मचारी उपलब्ध नहीं कराया गया। ऐसे में गंभीर हालत वाले मरीजों को भी परिजनों के भरोसे छोड़ दिया जाता है।
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इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर बहस छेड़ दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रशासन को इस तरह की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए, ताकि मरीजों और उनके परिवारों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
