EXCLUSIVE: भागीरथपुरा दूषित जल जांच आयोग की 112 पेज की रिपोर्ट आई सामने; नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल

Bhagirathpura Water Contamination: इंदौर के चर्चित भागीरथपुरा पेयजल प्रदूषण कांड पर जांच आयोग की अंतिम रिपोर्ट हाईकोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड, दूषित पानी से 22 लोगों की मौत की पुष्टि।
Madhya Pradesh High Court:  Bhagirathpura contaminated water inquiry commission 112 page report
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय(सोर्स- सोशल मीडिया)
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Water Contamination Exclusive Report: इंदौर के भागीरथपुरा पेयजल प्रदूषण कांड को लेकर गठित एक-सदस्यीय जांच आयोग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश कर दी थी जो आज हाईकोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड हो गयी। सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता वाले आयोग ने अपनी जांच में दूषित पानी को 22 लोगों की मौत का कारण माना है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पेयजल पाइपलाइन में सीवेज का पानी मिलने से एक्यूट गैस्ट्रोएंट्राइटिस का संक्रमण फैला था।

पानी में मिले ई कोलाई और फिकल कोलीफॉर्म

जांच के दौरान लिए गए पानी के सैंपलों में ई कोलाई और फिकल कोलीफॉर्म जैसे बैक्टीरिया पाए गए। रिपोर्ट के अनुसार, इन बैक्टीरिया की मौजूदगी ने पानी के सीवेज से दूषित होने की पुष्टि की। दूषित पानी पीने के बाद बड़ी संख्या में लोग बीमार हुए और अस्पतालों में भर्ती कराए गए।

पाइपलाइन और ड्रेनेज की गलत प्लानिंग बनी बड़ी वजह

आयोग ने पानी दूषित होने के पीछे इंजीनियरिंग स्तर की खामियों को भी जिम्मेदार माना है। रिपोर्ट के अनुसार, पेयजल और सीवरेज की पाइपलाइन को निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप पर्याप्त दूरी पर नहीं रखा गया था। दोनों लाइनें कई जगह बेहद करीब और समानांतर बिछाई गई थीं।

लो प्रेशर के चलते पेयजल में मिला सीवेज

रिपोर्ट में बताया गया है कि पुरानी और जर्जर पेयजल पाइपलाइन में लीकेज था। इसके साथ ही पानी की लाइन में लो प्रेशर बनने से आसपास की ओवरफ्लो ड्रेनेज लाइन का दूषित पानी पेयजल पाइपलाइन में पहुंच गया। इसी वजह से क्षेत्र में संक्रमण फैलने की स्थिति बनी।

रिकॉर्ड और नक्शे तक नहीं कर पाए पेश

जांच के दौरान इंदौर विकास प्राधिकरण और नगर निगम दोनों से पाइपलाइन से जुड़े पुराने नक्शे और इंजीनियरिंग ड्रॉइंग मांगी गई थीं। आयोग के सामने दोनों संस्थाएं अपने-अपने समय में बिछाई गई पाइपलाइनों के मूल रिकॉर्ड पेश नहीं कर सकीं। रिपोर्ट में इसे गंभीर प्रशासनिक और संस्थागत लापरवाही के तौर पर देखा गया है।

पाइपलाइन बदलने में 850 दिन से ज्यादा की देरी

आयोग की रिपोर्ट में पाइपलाइन बदलने की प्रक्रिया में हुई देरी पर भी सवाल उठाए गए हैं। टेंडर और कागजी कार्रवाई में 850 दिन से ज्यादा का समय लगा। रिपोर्ट के अनुसार, इतनी लंबी देरी के कारण खराब और जोखिम वाली पाइपलाइन को समय रहते बदला नहीं जा सका।

फील्ड इंजीनियरों और ठेकेदारों की भूमिका पर सवाल

आयोग ने मामले में फील्ड इंजीनियरों, एई, सब-इंजीनियर, तत्कालीन कार्यपालन यंत्री और संबंधित ठेकेदारों की भूमिका की जांच और जवाबदेही तय करने की बात कही है। रिपोर्ट में साफ किया गया है कि नागरिकों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना नगर निगम की जिम्मेदारी थी।

पूरे शहर के वाटर नेटवर्क का जीआईएस मैप बनाने की सिफारिश

जांच आयोग ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कई सुझाव भी दिए हैं। इनमें मध्य प्रदेश शहरी पेयजल प्राधिकरण के गठन का सुझाव शामिल है। इसके अलावा शहर के पूरे जल नेटवर्क का जीआईएस आधारित डिजिटल मैप तैयार करने और हर साल जल आपूर्ति व्यवस्था का सेफ्टी ऑडिट कराने की सिफारिश की गई है।

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रिपोर्ट के बाद अब कार्रवाई पर नजर

भागीरथपुरा जल प्रदूषण कांड की जांच रिपोर्ट में 22 मौतों को दूषित पानी से जोड़ते हुए प्रशासनिक और इंजीनियरिंग स्तर की कई खामियों को सामने रखा गया है। अब इस रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों और अन्य संबंधित पक्षों पर क्या कार्रवाई होती है, इस पर नजर रहेगी।

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