इंदौर: राजधर्म में रिश्तों से ऊपर न्याय…वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस में बोले CM महोन यादव
CM Mohan Yadav Statement: न्याय के सिंहासन पर बैठकर कोई अपना-पराया नहीं, सीएम मोहन यादव ने सुनाया विक्रमादित्य का प्रसंग, पेपर लीक मामलों के लिए 4 शहरों में बनेंगी फास्ट ट्रैक कोर्ट।
- Reported By: अंशुल मुकाती | Edited By: सजल रघुवंशी
सीएम मोहन यादव (सोर्स- सोशल मीडिया)
CM Mohan Yadav In West Zone Conference: इंदौर में आयोजित एमपीएसएलएसए वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारतीय न्याय परंपरा का जिक्र करते हुए सम्राट विक्रमादित्य का प्रसंग सुनाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजा के लिए निजी रिश्तों से ऊपर न्याय होता है। उन्होंने बताया कि विक्रमादित्य ने अपनी पत्नी के भाइयों को भी न्याय की कसौटी पर परखा और उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई थी।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि न्याय के सिंहासन पर बैठने के बाद राजा को अपना-पराया नहीं देखना चाहिए। उन्होंने भारतीय परंपरा में ‘पंच परमेश्वर’ की अवधारणा और भगवान श्रीकृष्ण के उस प्रयास का भी उल्लेख किया, जिसमें महाभारत का युद्ध टालने के लिए पांडवों की ओर से पांच गांवों का प्रस्ताव रखा गया था।
पेपर लीक पर फास्ट ट्रैक कोर्ट
मुख्यमंत्री ने युवाओं से जुड़े पेपर लीक मामलों पर सरकार की सख्ती का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे मामलों के जल्द निपटारे के लिए इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की पहल की गई है। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की सहमति के बाद प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है।
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UCC और नए कानूनों का भी जिक्र
सीएम मोहन यादव ने समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी का उल्लेख करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने रंजना देसाई समिति की सिफारिशों के आधार पर यूसीसी विधेयक पारित किया है। उन्होंने इसे समानता और एकरूप न्याय व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आगे कहा कि न्याय व्यवस्था में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल पर भी जोर दिया। उन्होंने ई-फाइलिंग, डिजिटल रिकॉर्ड, वर्चुअल सुनवाई, जीरो एफआईआर और ‘वन डेटा-वन केस’ जैसी व्यवस्थाओं को न्याय प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने वाला बताया।
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कानून मंत्री बोले- न्याय सिर्फ अदालतों की जिम्मेदारी नहीं
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि न्याय केवल अदालतों, न्यायाधीशों या न्यायिक संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक की सामूहिक संवैधानिक जिम्मेदारी है। उन्होंने लीगल डिफेंस काउंसिल, कानून के विद्यार्थियों, रिसर्चर्स और पैरा-लीगल वॉलंटियर्स से जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की अपील की। कानून मंत्री ने कहा कि प्रो-बोनो लीगल सर्विस को केवल समाज सेवा नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए।
