इछावर में एम्बुलेंस बनी ‘स्कूल वैन’, मरीजों की जगह ढोए जा रहे बच्चे; सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ वीडियो
Ambulance Misuse News: सीहोर के इछावर में खुली स्वास्थ्य विभाग की पोल, मरीज के इंतजार के बीच सरकारी एम्बुलेंस में ढोए जा रहे स्कूली बच्चे, फर्जी बिलिंग और जांच के आदेश।
- Written By: सजल रघुवंशी
इछावर में एम्बुलेंस बनी स्कूल वैन (सोर्स- सोशल मीडिया)
Ichhawar Government Ambulance Misuse: सरकार द्वारा मरीजों की जान बचाने और समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित की जा रही सरकारी एम्बुलेंस सेवा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सीहोर जिले के इछावर क्षेत्र से सामने आए एक मामले ने स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में दावा किया जा रहा है कि मरीजों के लिए संचालित एम्बुलेंस का इस्तेमाल स्कूली बच्चों और आम सवारियों को लाने-ले जाने में किया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
वायरल वीडियो ने खोली व्यवस्था की पोल
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे वीडियो में कथित तौर पर सरकारी एम्बुलेंस में स्कूली बच्चों और अन्य सवारियों को बैठाकर ले जाते हुए देखा जा सकता है। लोगों का कहना है कि जिन वाहनों का उपयोग केवल मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए होना चाहिए, उनका इस्तेमाल निजी कार्यों में किया जा रहा है। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
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डीजल और मीटर रीडिंग में गड़बड़ी के आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ चालक सरकारी डीजल का दुरुपयोग कर एम्बुलेंस को अनावश्यक रूप से इधर-उधर चलाते हैं। इससे वाहन की मीटर रीडिंग बढ़ाई जाती है और फर्जी बिल या भुगतान का लाभ लेने की कोशिश की जाती है। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का गंभीर मामला माना जाएगा।
मरीज इंतजार में, एम्बुलेंस ढाबों पर खड़ी होने का दावा
स्थानीय लोगों का कहना है कि आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस के लिए कॉल करने पर कई बार 3 से 4 घंटे तक वाहन उपलब्ध न होने की बात कही जाती है। वहीं दूसरी ओर, क्षेत्र के ढाबों, होटलों और निजी आयोजनों के बाहर सरकारी एम्बुलेंस खड़ी दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। इससे ग्रामीणों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद सीहोर स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते निगरानी और कार्रवाई की जाती, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
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अब सभी की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला मरीजों की सुरक्षा और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन सकता है।
