डिंडोरी का प्यासा गांव: भीषण गर्मी में सूखे कुए और बावड़ी, बूंद-बूंद पानी के लिए 2KM दूर जाने को मजबूर ग्रामीण
Khmariya Village Water Problem: डिंडोरी के खमरिया गांव पानी की समस्या से जूझ रहा है। भीषण गर्मी में गांव के जल स्त्रोत सूख गए हैं। ऐसे में ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए 2 किमी दूर जाने को मजबूर हैं।
- Written By: प्रीतेश जैन
सूखे कुए से बूंद-बूंद पानी निकालते ग्रामीण (फोटो सोर्स- नवभारत)
Dindori Water Crisis News: डिंडोरी जिले के आदिवासी अंचल में भीषण गर्मी के बीच पानी का संकट गहराता जा रहा है। मेहदवानी विकासखंड की ग्राम पंचायत सुखलोड़ी के वनग्राम खमरिया में हालात बेहद चिंताजनक हैं, जहां ग्रामीण सूखे कुएं से बूंद-बूंद पानी निकालकर अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं। एक तरफ सरकार जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जल संरक्षण और हर घर जल पहुंचाने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव के कुएं, बावड़ी और अन्य जल स्रोत पूरी तरह सूख चुके हैं। जहां थोड़ा बहुत रिसाव होता है, वहां जमा हुए पानी को बाल्टी के सहारे निकालकर पीने योग्य बनाया जा रहा है। लेकिन यह व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं है, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
रोजाना 2 किलोमीटर दूर से पानी ला रहे ग्रामीण
गर्मी के इस मौसम में ग्रामीणों को करीब 2 किलोमीटर दूर पहाड़ी और घाट का रास्ता तय कर पानी लाना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को हो रही है, जो रोजाना इस कठिन सफर से गुजरने को मजबूर हैं।
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जिम्मेदारों से शिकायत पर मिला सिर्फ आश्वासन
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार पंचायत सचिव और जिम्मेदार अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन केवल आश्वासन ही मिला। न तो गांव में टैंकर की समुचित व्यवस्था की गई और न ही खराब हैंडपंपों की मरम्मत कराई गई। पंचायत की इस उदासीनता से लोगों में गहरा आक्रोश है। पानी की किल्लत से परेशान सैकड़ों ग्रामीण जनपद पंचायत मेहदवानी पहुंचे और पंचायत विभाग के खिलाफ नाराजगी जताते हुए तत्काल राहत की मांग की।
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ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। सबसे बड़ा सवाल यह है कि हर साल गर्मियों में जल संकट की स्थिति बनने के बावजूद जिम्मेदार विभाग पहले से तैयारी क्यों नहीं करता? करोड़ों रुपए की योजनाओं और कागजी दावों के बीच ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधा—पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
