केमिकल के गलत अनुपात ने मचाई तबाही! देवास पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट में तीन मजदूरों की मौत; 13 गंभीर रूप से घायल

Dewas News: टोंक कलां में पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में 3 मजदूरों की मौत हो गई। फैक्ट्री मालिक को गिरफ्तार कर लिया गया है, रसायनों के मिश्रण में चूक को हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है।
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देवास फैक्ट्री ब्लास्ट (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Dewas Firecracker Factory Blast Update: मध्य प्रदेश के देवास जिले के टोंक कलां क्षेत्र में गुरुवार सुबह करीब 11:30 बजे एक पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट हो गया। इस हादसे में धीरज, सनी और सुमित नामक तीन मजदूरों की जान चली गई, जबकि 25 अन्य लोग घायल हो गए। घायलों में 13 की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

बताया जा रहा है कि फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश के निवासी थे। धमाका इतना जबरदस्त था कि शवों के अंग 20 से 25 फीट दूर तक जा गिरे और फैक्ट्री की दीवारों को भी भारी नुकसान पहुंचा।

पुलिस ने फैक्ट्री मालिक को किया गिरफ्तार

घटना के बाद प्रशासन ने फैक्ट्री को सील कर दिया है, जबकि पुलिस ने फैक्ट्री मालिक अनिल मालवीय को हिरासत में ले लिया है। बता दें कि, हादसे के बाद सोशल मीडिया पर भारतीय जनता पार्टी सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी और फैक्ट्री संचालक अनिल मालवीय की एक तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है। फोटो में भारतीय जनता पार्टी सांसद सोलंकी, अनिल मालवीय को मिठाई खिलाते हुए दिखाई दे रहे हैं। हालांकि इस बात पर सोलंकी ने साफ कहा कि वह उन्हें जानते हैं लेकिन मालवीय उनके कार्यकर्ता नहीं है।

इस वजह से हुआ इतना बड़ा ब्लास्ट

एक मीडिया रिपोर्ट मौके पर मौजूद लोगों के हवाले से यह दावा कर रही है कि फैक्ट्री में दो तरह के केमिकल मिलाकर बारूद तैयार किया जा रहा था। इसी प्रक्रिया के दौरान रसायनों का अनुपात बिगड़ने से जोरदार विस्फोट हो गया। बताया जा रहा है कि जिस स्थान पर धमाका हुआ, वहां करीब 15 से 20 मजदूर काम कर रहे थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, हादसा लंच ब्रेक से करीब 15 से 20 मिनट पहले हुआ। कर्मचारियों के लिए खाना पहुंच चुका था लेकिन विस्फोट होते ही अफरा-तफरी मच गई और लोग भोजन छोड़कर अपनी जान बचाने के लिए बाहर की ओर भागने लगे।

घटना के बाद ग्रामीणों ने किया कमिश्नर का घेराव

हादसे के बाद ग्रामीणों ने कमिश्नर का घेराव करते हुए प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए। लोगों का कहना था कि अवैध रूप से संचालित फैक्ट्री के खिलाफ पहले कभी ठोस कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों के मुताबिक फैक्ट्री में लगभग 400 से 500 मजदूर काम करते थे, जिनमें पुरुष श्रमिकों को प्रतिदिन 400 रुपये और महिला श्रमिकों को 250 रुपये मजदूरी दी जाती थी। मजदूरों का भुगतान साप्ताहिक आधार पर किया जाता था।

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