

Narottam Mishra Supporters FIR: दतिया उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी के भीतर मचा सियासी घमासान फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। पूर्व गृह मंत्री और पार्टी के बड़े चेहरे नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटने के फैसले के बाद जिस तरह उनके समर्थक सड़क पर उतर आए, उसने बीजेपी की अंदरूनी असहजता को खुलकर सामने ला दिया। अब इस पूरे घटनाक्रम में नया मोड़ उन FIR को लेकर आया है, जो प्रदर्शन और हिंसा के आरोप में नरोत्तम मिश्रा के कई करीबी समर्थकों पर दर्ज की गई हैं।
यहीं से सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल खड़ा होता है। एक तरफ बीजेपी के शीर्ष नेता नरोत्तम मिश्रा को मनाने, उनके सम्मान को बनाए रखने और उन्हें चुनाव प्रचार में सक्रिय करने की कोशिश कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ उन्हीं के करीबी समर्थकों पर कानूनी कार्रवाई हो रही है। ऐसे में पार्टी का संदेश आखिर क्या है?
दतिया उपचुनाव में बीजेपी प्रत्याशी घोषित होने के बाद नाराज समर्थकों ने नेशनल हाईवे पर करीब 11 घंटे तक चक्काजाम किया। लंबा ट्रैफिक जाम लगा, आम लोगों को भारी परेशानी हुई और कई जगह तोड़फोड़ व हिंसा की घटनाएं भी सामने आईं। इसके बाद पुलिस ने 27 नामजद भाजपा नेताओं और 200 अज्ञात कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। इनमें ऐसे नाम भी शामिल हैं जिन्हें लंबे समय से नरोत्तम मिश्रा का बेहद करीबी माना जाता रहा है।
समर्थकों पर दर्ज FIR को लेकर नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि कार्यकर्ता क्षणिक आवेश में थे और अब माहौल पूरी तरह शांत है। उन्होंने यह भी बताया कि बीजेपी कार्यकर्ताओं पर हुई FIR का मामला पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के संज्ञान में ला दिया गया है और जल्द ही सब व्यवस्थित हो जाएगा। नरोत्तम मिश्रा ने यह भी साफ किया कि वे बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को जिताने के लिए भावुक और मार्मिक अपील करेंगे।
इससे पहले बीजेपी प्रत्याशी के समर्थन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नरोत्तम मिश्रा भावुक होकर मंच पर रो पड़े थे। उस दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने उन्हें सांत्वना दी थी। इस तस्वीर ने साफ संकेत दिया कि बीजेपी नेतृत्व किसी भी कीमत पर नरोत्तम मिश्रा की नाराजगी को चुनावी नुकसान में बदलने नहीं देना चाहता।
राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में बीजेपी इस समय दो मोर्चों पर संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। पहला, नरोत्तम मिश्रा जैसे बड़े नेता की नाराजगी दूर करना ताकि चुनावी नुकसान न हो। दूसरा, कानून-व्यवस्था को लेकर यह संदेश देना कि हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर कार्रवाई होगी, चाहे वे किसी भी नेता के समर्थक क्यों न हों, लेकिन यही संतुलन बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती भी बन गया है।