

Datia By Election Exclusive Analysis: पूरे देश में चर्चा का विषय बने दतिया विधानसभा उपचुनाव में मतदान संपन्न होने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में जीत-हार को लेकर अटकलों का दौर तेज हो गया है। मतदान के बाद जहां भाजपा और कांग्रेस दोनों अपनी-अपनी जीत का दावा कर रही हैं, वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल किसी भी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
नवभारत के विशेष राजनीतिक विश्लेषण में वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार सुधीर दंडोतिया ने कहा कि दतिया उपचुनाव की तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है। उनके अनुसार मुकाबला बेहद कड़ा और रोचक है, इसलिए फिलहाल किसी दल की जीत या हार का निश्चित अनुमान लगाना संभव नहीं है। दंडोतिया ने बताया कि कांग्रेस करीब 25 हजार वोटों से जीत का दावा कर रही है, जबकि भाजपा भी 20 हजार वोटों से जीत का भरोसा जता रही है। ऐसे में दोनों दलों के दावों के बीच वास्तविक स्थिति का पता मतगणना के दिन ही चल सकेगा।
सुधीर दंडोतिया ने कहा कि इस पूरे उपचुनाव का सबसे बड़ा राजनीतिक केंद्र पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा रहे। चुनावी रणनीति से लेकर प्रचार और राजनीतिक विमर्श तक, लगभग पूरा चुनाव उनके इर्द-गिर्द ही घूमता रहा। दंडोतिया के अनुसार यदि भाजपा चुनाव जीतती है तो इसका श्रेय पार्टी संगठन, प्रदेश नेतृत्व और मुख्यमंत्री को दिया जाएगा लेकिन यदि कांग्रेस जीत दर्ज करती है तो राजनीतिक जवाबदेही का बड़ा हिस्सा नरोत्तम मिश्रा पर आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
मतदान प्रतिशत अपेक्षाकृत कम रहने के सवाल पर दंडोतिया ने कहा कि राजनीतिक हलकों में यह धारणा बनाई जा रही है कि कम मतदान का असर भाजपा पर पड़ सकता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका वास्तविक प्रभाव मतगणना के बाद ही सामने आएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव मैदान में तीसरे प्रमुख उम्मीदवार दामोदर यादव की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। उनके अनुसार दामोदर यादव दोनों प्रमुख दलों—भाजपा और कांग्रेस—के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं, जिससे अंतिम परिणाम पर प्रभाव पड़ना संभव है। अब सभी की निगाहें मतगणना पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि दतिया की जनता ने किस दल और किस उम्मीदवार पर अपना भरोसा जताया है।
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