Navratri Special: दतिया में 70 साल से जारी मूर्ति कला की परंपरा, ब्लुकिया परिवार गढ़ रहा मां दुर्गा का स्वरूप

Blukiya family 70 Years Craftsmanship: दतिया में नवरात्रि की तैयारियां जोरों पर, गुर्जा सरकार मूर्ति कला केंद्र में ब्लुकिया परिवार पिछले 70 वर्षों से मां दुर्गा की प्रतिमाओं को गढ़ रहा है।
Blukiya family preserving traditional idol craftsmanship for Navratri
दतिया में 70 साल से ब्लुकिया परिवार बना रहा मां दुर्गा की प्रतिमाएं(सोर्स- सोशल मीडिया)
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HIGHLIGHTS:

  • दतिया में नवरात्रि की तैयारियां तेज, मूर्तियों को अंतिम रूप देने में जुटे कलाकार।

  • ब्लुकिया परिवार 70 साल से कर रहा मां दुर्गा की प्रतिमाओं का निर्माण।

  • गुर्जा सरकार मूर्ति कला केंद्र में तैयार हो रहीं 50-60 प्रतिमाएं।

  • महंगाई से घटा मुनाफा, पुश्तैनी कला बचाने में जुटा परिवार।

Blukiya Family Durga Murti Art Datia: दतिया में शारदीय नवरात्रि का आगमन 11 अक्टूबर से हो जाएगा इसके साथ ही मां दुर्गा की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने की तैयारियां तेज हो गई हैं। मंदिरों और पूजा पंडालों में मां की स्थापना की तैयारियों के बीच मूर्तिकार दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। मिट्टी को आकार देकर मां दुर्गा का भव्य स्वरूप तैयार करने वाले इन कलाकारों की मेहनत के पीछे आस्था के साथ-साथ वर्षों पुरानी पारिवारिक परंपरा भी जुड़ी हुई है।

दतिया के भांडरी फाटक पर राव साहब की हवेली के पास स्थित श्री गुर्जा सरकार मूर्ति कला केंद्र, दारुगर की पुलिया, में ब्लुकिया परिवार पिछले लगभग 70 वर्षों से मूर्ति निर्माण का कार्य कर रहा है। जगन्नाथ ब्लुकिया और उनके पुत्रों सहित परिवार की नई पीढ़ी इस पुश्तैनी कला को आगे बढ़ाने में जुटी हुई है। परिवार के लिए यह केवल कला नहीं, बल्कि आजीविका का प्रमुख साधन भी है।

20 दिन पहले शुरू कर दिया जाता है प्रतिमाओं को तैयार करने का काम

परिवार के अनुसार, शारदीय नवरात्रि के लिए मां दुर्गा की प्रतिमाएं तैयार करने का काम लगभग 20 दिन पहले शुरू कर दिया जाता है। प्रतिमाओं को आकार देने, उनकी बनावट और सजावट के बाद रंग-रोगन किया जाता है। नवरात्रि त्योहार से लगभग पांच दिन पहले प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। इस दौरान मां दुर्गा के नेत्र तैयार करने और उन्हें अंतिम रूप से खोलने की विशेष परंपरा निभाई जाती है, जिसके बाद प्रतिमाओं का स्वरूप और भी आकर्षक दिखाई देने लगता है।

गुर्जा सरकार मूर्ति कला केंद्र में तैयार की जा रही 50 से 60 प्रतिमाएं

इस बार श्री गुर्जा सरकार मूर्ति कला केंद्र में लगभग 50 से 60 प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। इन प्रतिमाओं की स्थापना दतिया शहर के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और विभिन्न स्थानों पर की जाएगी। मूर्तिकारों की कार्यशाला में छोटी-बड़ी प्रतिमाओं को तैयार करने का काम लगातार जारी है।

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"महंगाई के कारण मुनाफा कम"

मूर्ति निर्माण के इस पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े परिवार का कहना है कि वर्तमान समय में मिट्टी, रंग, सजावट और अन्य आवश्यक सामग्री की लागत बढ़ गई है। इसके बावजूद प्रतिमाओं की बिक्री से होने वाला लाभ अपेक्षाकृत कम है। लगातार बढ़ती महंगाई के बीच पुश्तैनी कला को बचाए रखना और इसी काम से परिवार का भरण-पोषण करना मूर्तिकारों के लिए चुनौती बनता जा रहा है।

इसके बावजूद ब्लुकिया परिवार अपनी परंपरा को आगे बढ़ाने में जुटा है। करीब सात दशकों से जारी यह कला आज भी दतिया की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा बनी हुई है। नवरात्रि के दौरान जब मां दुर्गा की प्रतिमाएं पंडालों में स्थापित होंगी, तब उनके पीछे मूर्तिकारों की मेहनत, हुनर और पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा की झलक भी दिखाई देगी।

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