

Pandhurna Gotmar Mela : पांढुर्णा में सदियों पुरानी गोटमार मेले की परंपरा एक बार फिर शुरू हो गई। मां चंडी मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद जाम नदी के बीच पलाश का पेड़ स्थापित किया गया। इसके बाद पांढुर्णा और सावरगांव के ग्रामीण नदी के दोनों ओर जुटे और पारंपरिक रूप से एक-दूसरे पर पत्थर बरसाने लगे। पत्थरबाजी के चलते मौके पर बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं।
मेले के दौरान पत्थर लगने से अब तक 150 से ज्यादा लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। कई लोगों के सिर में चोट लगी है। वहीं चार खिलाड़ियों को गंभीर चोटें आई हैं। इनमें किसी के कंधे की हड्डी टूटने तो किसी के पैर में फ्रैक्चर होने की जानकारी है। गंभीर रूप से घायल एक व्यक्ति को इलाज के लिए नागपुर रेफर किया गया है। मेले के दौरान घायलों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
परंपरा के मुताबिक पांढुर्णा और सावरगांव के ग्रामीण जंगल से पलाश का पेड़ लाते हैं। इसकी मां चंडिका मंदिर में पूजा की जाती है और फिर इसे जाम नदी के बीच स्थापित किया जाता है। नदी के एक तरफ पांढुर्णा और दूसरी तरफ सावरगांव के लोग जमा होते हैं। पांढुर्णा के लोग झंडे को हासिल करने की कोशिश करते हैं, जबकि सावरगांव के लोग उन्हें रोकते हैं। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच पत्थर चलने की परंपरा है।
मेले को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। पांढुर्णा समेत आसपास के तीन जिलों से पुलिस बल तैनात किया गया है। 700 से ज्यादा पुलिस अधिकारी और कर्मचारी सुरक्षा व्यवस्था में लगाए गए हैं। पूरे क्षेत्र की निगरानी ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के जरिए की जा रही है। कलेक्टर और एसपी भी मौके पर मौजूद हैं।
घायलों को तत्काल इलाज उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने भी तैयारी की है। मौके पर 22 एंबुलेंस और 44 डॉक्टरों समेत बड़ी संख्या में स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती की गई है। बारिश के कारण जाम नदी में पानी बढ़ने को देखते हुए SDERF की टीम को भी मौके पर तैनात किया गया है, ताकि किसी आपात स्थिति में तत्काल रेस्क्यू किया जा सके।
प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक प्रावधान लागू किए हैं और मेले के दौरान शराब की बिक्री पर भी रोक लगाई गई है। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है। ड्रोन से निगरानी के साथ नियमों का उल्लंघन करने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।