

Chhindwara Tribal Hostel Girls Protest : छिंदवाड़ा में आदिवासी छात्रावास से जुड़ा एक और मामला सामने आया है। शहर के कन्या शिक्षक परिषद छात्रावास की बच्चियों ने अपनी मांगों को लेकर चौकी के सामने धरना दिया। हाथों में तख्तियां लेकर बैठी बच्चियों ने 'हमें न्याय चाहिए' और 'रजनी मैडम नहीं चाहिए' जैसे नारे लिखे। बच्चियों के धरने का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद छात्रावास व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
धरने पर बैठी छात्राओं ने छात्रावास की अधीक्षक रजनी मैडम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बच्चियों का कहना है कि उन्हें नियम के मुताबिक भोजन नहीं दिया जाता और छात्रावास में जरूरी सुविधाओं का भी अभाव है। छात्राओं ने आरोप लगाया कि जब वे अपनी समस्याओं को लेकर शिकायत करती हैं तो उन पर दबाव बनाया जाता है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों या अधीक्षक का पक्ष सामने नहीं आया है।
छात्रावास से जुड़ी यह घटना इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि छिंदवाड़ा में एक महीने के भीतर आदिवासी छात्रावास से जुड़ा यह तीसरा मामला बताया जा रहा है। लगातार सामने आ रही शिकायतों ने छात्रावासों में व्यवस्थाओं और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले ग्रामीण क्षेत्र के छात्रावास से भी मामला सामने आने की बात कही जा रही है। अब शहर के छात्रावास की बच्चियों के धरने ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
धरने के दौरान बच्चियों के हाथों में मौजूद तख्तियों ने पूरे मामले को सामने ला दिया। तख्तियों पर 'रजनी मैडम नहीं चाहिए' और 'हमें न्याय चाहिए' जैसे संदेश लिखे थे। बच्चियों का कहना है कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुना जाए और छात्रावास में उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। बच्चियां अपनी मांगों को लेकर चौकी के सामने बैठी हैं और कार्रवाई का इंतजार कर रही हैं।
मामले को लेकर आदिवासी विभाग के सहायक आयुक्त सत्येंद्र मरकाम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। लगातार शिकायतों के बावजूद छात्रावासों की व्यवस्थाओं को लेकर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही, यह बड़ा सवाल है। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि यदि एक ही महीने में छात्रावासों से बार-बार शिकायतें सामने आ रही हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
बच्चियों के धरने के बीच आदिवासी हितों की बात करने वाले नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि छात्रावासों में रहने वाली बच्चियों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाना चाहिए। फिलहाल बच्चियां चौकी के सामने अपनी मांगों को लेकर बैठी हैं और प्रशासन से न्याय की उम्मीद कर रही हैं। अब देखना होगा कि अधिकारियों की ओर से मामले की जांच कर क्या कार्रवाई की जाती है।