

Gwalior Shinde Ki Chhawani Road : ग्वालियर के शिंदे की छावनी इलाके में नगर निगम के घटिया पैचवर्क और लापरवाही की पोल बारिश ने खोल दी। ग्वालियर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 33 के अति व्यस्त मार्ग पर कुछ समय पहले बड़े गड्ढे में डामर या गिट्टी डालने के बजाय मिट्टी भरकर लीपापोती कर दी गई थी। शुक्रवार को बारिश के बाद यही मिट्टी धंस गई और सड़क के बीचों-बीच खतरनाक गड्ढा बन गया। इससे मुख्य मार्ग पर यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई और करीब दो घंटे तक वाहन रेंगते रहे।
सड़क धंसने के बाद शिंदे की छावनी का मुख्य मार्ग बेहद संकरा हो गया। इसी दौरान कांग्रेस विधायक सतीश सिंह सिकरवार भी जाम में फंस गए। हालात ऐसे थे कि आगे बढ़ने का रास्ता नहीं बचा था। आखिरकार विधायक की गाड़ी को सड़क के बीच धंसी मिट्टी और गड्ढे से होकर निकालना पड़ा। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब जनप्रतिनिधि की गाड़ी तक ऐसी सड़क से गुजरने को मजबूर है तो आम लोगों की परेशानी का अंदाजा लगाया जा सकता है।
बारिश के बाद मिट्टी धंसने से सड़क का एक हिस्सा दलदल में बदल गया। वहीं, चेंबर के फैलाव और बीच सड़क पर बने गड्ढे के कारण रास्ता और ज्यादा संकरा हो गया। इस दौरान कई चार पहिया वाहन गड्ढे में फंस गए। वाहनों को निकालने के लिए स्थानीय नागरिकों को खुद मोर्चा संभालना पड़ा। लोगों ने मशक्कत कर फंसी कारों को बाहर निकाला, जबकि सड़क से गुजरने वाले वाहन चालकों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
शिंदे की छावनी का यह मार्ग शहर के महत्वपूर्ण रास्तों में शामिल है और यहां से रोजाना बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं। सुबह के समय सड़क धंसने के कारण दफ्तर जाने वाले कर्मचारी, स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थी, आम राहगीर और अन्य वाहन चालक जाम में फंस गए। करीब दो घंटे तक यातायात बेहद धीमी गति से चलता रहा। लोगों का आरोप है कि मुख्य मार्ग पर पहले से मौजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया, जिसका खामियाजा अब आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
मामले की जानकारी मिलने के बाद कांग्रेस नेता प्रतिनिधि सुनील शर्मा मौके पर पहुंचे और सड़क की बदहाल स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने नगर निगम के उच्च अधिकारियों को पूरे मामले से अवगत कराया। इसके बाद नगर निगम प्रशासन हरकत में आया और आनन-फानन में गिट्टी मौके पर भेजकर धंसे हुए हिस्से की पैच रिपेयरिंग कराई गई। इसके बाद यातायात को धीरे-धीरे बहाल किया जा सका, हालांकि स्थानीय लोगों ने इसे स्थायी समाधान नहीं माना।
भीषण जाम और सड़क धंसने के बावजूद काफी देर तक मौके पर यातायात व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस या प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी नजर नहीं आया। इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी गई। लोगों का कहना है कि इतने व्यस्त मार्ग पर घंटों तक यातायात प्रभावित रहा, लेकिन व्यवस्था संभालने के लिए तत्काल कदम नहीं उठाए गए। स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम से मांग की है कि मिट्टी डालकर की गई अस्थायी मरम्मत के बजाय सड़क का तत्काल पक्का डामरीकरण कराया जाए और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।