भोपाल का 'अजूबा' निर्माण! 5 लाख की लागत से बनाया शौचालय, लेकिन सामने खड़ी कर दी दीवार; अब कैसे जाएंगे लोग?

Bhopal News: भोपाल में विकास योजनाओं को लेकर एक बार फिर गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। ताजा मामला वार्ड-40 का है, जहां बन रहे सुलभ शौचालय के सामने ही दीवार खड़ी कर दी गई है।
Bhopal Ward 40 Toilet Construction Blocked By Railway Wall Negligence
भोपाल अजूबा नि्र्माण (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Toilet Trapped Within A Wall Bhopal: भोपाल में विकास योजनाओं को लेकर एक बार फिर गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। ताजा मामला वार्ड-40 का है, जहां बन रहे सुलभ शौचालय के सामने ही दीवार खड़ी कर दी गई है। इस अजीबोगरीब निर्माण से साफ संकेत मिलता है कि शौचालय बनने के बाद भी लोगों के लिए उसका उपयोग संभव नहीं होगा। इस घटना ने न सिर्फ लोगों को चौंकाया है बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह पूरा मामला जोन-11 के बाग उमराव दूल्हा और ऐशबाग क्षेत्र से जुड़ा है, जहां पहले ही 90 डिग्री कोण वाले रेलवे ओवरब्रिज को लेकर विवाद खड़ा हो चुका है। अब उसी इलाके में शौचालय के सामने दीवार बना देने से योजना निर्माण की खामियां फिर उजागर हो गई हैं।

रेलवे जमीन के नजदीक है शौचालय

जानकारी के अनुसार, जहां सार्वजनिक सुलभ शौचालय तैयार किया जा रहा है, वह स्थान रेलवे की जमीन के बिल्कुल नजदीक है। हाल ही में रेलवे ने अपनी सीमा तय करते हुए वहां बाउंड्री वॉल खड़ी कर दी, जो सीधे शौचालय के प्रवेश मार्ग के सामने आ गई है। ऐसे में स्थिति यह बन गई है कि निर्माण पूरा होने के बाद भी आम लोग इस शौचालय तक पहुंच नहीं सकेंगे।

स्थानीय लोगों ने जताई थी आपत्ति

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस निर्माण को लेकर उन्होंने पहले ही आपत्ति दर्ज कराई थी। 11 फरवरी 2026 को जोनल अधिकारी को दिए गए आवेदन में स्पष्ट कहा गया था कि क्षेत्र में करीब 400 दुकानें संचालित हैं। यहां पार्किंग और शौचालय की सख्त जरूरत है। प्रस्तावित स्थान ट्रैफिक और उपयोग के लिहाज से सही नहीं है। रहवासियों ने यह भी सुझाव दिया था कि पास में मौजूद जर्जर पानी की टंकी को हटाकर वहां शौचालय बनाया जाए, लेकिन उनकी मांग को नजरअंदाज कर दिया गया।

विकास का विचित्र उदाहरण

एक स्थानीय निवासी ने निवासी ने मीडिया से कहा कि भारतीय रेलवे की जमीन से सटे इस शौचालय का निर्माण अब बाउंड्री वॉल के कारण पूरी तरह घिर गया है। ऐसी स्थिति में इसके उपयोग की कोई गुंजाइश नहीं बची है। लोगों का मानना है कि यह विकास का एक विचित्र उदाहरण है, जहां सुविधा तैयार होने से पहले ही निष्प्रभावी हो गई है।

5 लाख का हुआ खर्च

जानकारी के मुताबिक इस सुलभ शौचालय के निर्माण पर लगभग 5 लाख रुपये की राशि खर्च की जा रही है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब आम लोगों की पहुंच ही वहां तक नहीं होगी, तो यह खर्च आखिर किस काम का है? इसे सीधे तौर पर सरकारी धन के दुरुपयोग के रूप में देखा जा रहा है।

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