भोपाल मेट्रो पर वक्फ का कानूनी ब्रेक? कब्रिस्तान के नीचे से लाइन गुजारने पर रोक की मांग तेज; जानें पूरा मामला

Bhopal News: भोपाल मेट्रो के अंडरग्राउंड रूट पर कानूनी संकट! प्राचीन कब्रिस्तानों के नीचे से लाइन गुजारने के खिलाफ वक्फ अधिकरण में केस दर्ज, 14 मई को सुनवाई।
Bhopal Metro Project Waqf Tribunal Legal Dispute Underground Line Cemetery
प्रतीकात्मक इमेज (सोर्स- एआई जनरेटेड)
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Bhopal Undergound Metro Waqf Dispute: भोपाल में मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर वक्फ संपत्तियों से जुड़ा विवाद अब कानूनी रूप लेता दिखाई दे रहा है। भोपाल टॉकीज स्थित प्राचीन कब्रिस्तान के नीचे प्रस्तावित अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन और नारियलखेड़ा स्थित वक्फ भूमि पर किए जा रहे निर्माण कार्य को चुनौती देते हुए कमेटी इंतेजामियां औकाफ-ए-आम्मा ने मध्य प्रदेश राज्य वक्फ अधिकरण में दो अलग-अलग मामले दायर किए हैं।

शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान मेट्रो निर्माण पर रोक लगाने की मांग को लेकर प्रारंभिक बहस हुई। वक्फ अधिकरण ने स्टे से संबंधित बहस के लिए अगली सुनवाई 14 मई तय की है। इस दौरान मेट्रो प्रबंधन को भी अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।

अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन का विरोध तेज

पहले मामले में हमीदिया रोड स्थित मासूमा तकिया अम्मनशाह, मस्जिद नूरानी, मुल्लाशाह और अन्य पंजीकृत वक्फ कब्रिस्तान क्षेत्रों के नीचे से प्रस्तावित अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन निकाले जाने का विरोध किया गया है। याचिका में दावा किया गया है कि यह इलाका भोपाल के सबसे पुराने और ऐतिहासिक कब्रिस्तानों में शामिल है, जहां हजारों कब्रें मौजूद हैं।

एक एकड़ क्षेत्र सीधे प्रभावित हो सकता है- कमेटी का दावा

कमेटी का कहना है कि प्रस्तावित अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन से करीब एक एकड़ क्षेत्र सीधे प्रभावित हो सकता है, जिससे कब्रों की संरचना और धार्मिक महत्व पर असर पड़ने की आशंका है। वादी पक्ष ने आरोप लगाया है कि अब तक मेट्रो प्रबंधन ने इस हिस्से से जुड़े विस्तृत नक्शे, तकनीकी रिपोर्ट और सुरक्षा आकलन सार्वजनिक नहीं किए हैं, जिससे स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ गई है।

कब्रों और धार्मिक ढ़ांचो को नुकसान पहुंचने की आशंका

कमेटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अंसार उल हक और अधिवक्ता इब्राहिम सरवत शरीफ खान पक्ष रख रहे हैं। अधिवक्ता खान ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट अपने कई फैसलों में स्पष्ट कर चुके हैं कि कब्रिस्तान की मूल प्रकृति किसी भी स्थिति में परिवर्तित नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि भले ही मेट्रो लाइन को अंडरग्राउंड बताया जा रहा हो, लेकिन खुदाई, सुरंग निर्माण और कंपन जैसी गतिविधियों से कब्रों और धार्मिक ढांचों को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी हुई है।

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