विवादों में घिरी भोपाल मेट्रो, कब्रिस्तान के नीचे अंडरग्राउंड लाइन का विरोध, वक्फ की जमीन पर निर्माण का आरोप

Bhopal Metro Controversy: राजधानी भोपाल की मेट्रो परियोजना अब एक बड़े कानूनी और धार्मिक विवाद में उलझ गई है। ऐतिहासिक कब्रिस्तान और वक्फ की जमीन पर निर्माण को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
Waqf Board Case Metro Bhopal
भोपाल मेट्रो (फोटो सोर्स- नवभारत)
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Bhopal Metro Waqf  Land Controversy: मेट्रो को फोटोशूट के लिए किराए पर देने की चर्चा इन दिनों देश भर में है। इस बीच Bhopal Metro को लेकर एक और विवाद सामने आया है । भोपाल की मेट्रो रेल परियोजना, जिसे शहर के विकास की नई इबारत लिखनी है वो अब एक गंभीर कानूनी और धार्मिक दुविधा में फंसती नजर आ रही है।

राजधानी में मेट्रो के अंडरग्राउंड कॉरिडोर के निर्माण को लेकर प्राचीन कब्रिस्तानों और वक्फ संपत्तियों पर विवाद गहराता जा रहा है। वक्फ बोर्ड की कमेटी ने मध्य प्रदेश राज्य वक्फ अधिकरण में दो अलग-अलग प्रकरण दायर कर मेट्रो निर्माण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

क्या है विवाद ?

दरअसल यह सारा विवाद भोपाल टॉकीज स्थित प्राचीन कब्रिस्तान के नीचे प्रस्तावित अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन और नारियलखेड़ा की वक्फ जमीन पर हो रहे निर्माण कार्य से जुड़ा है। कमेटी इंतेजामियां औकाफ-ए-आम्मा ने इन दोनों ही मामलों में अपनी गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता अंसार उल हक और अधिवक्ता इब्राहिम सरवत शरीफ खान कमेटी की ओर से इन संवेदनशील मामलों की पैरवी कर रहे हैं। पहले प्रकरण में, हमीदिया रोड स्थित मासूमा तकिया अम्मनशाह, मस्जिद नूरानी, मुल्लाशाह और अन्य पंजीकृत वक्फ कब्रिस्तान क्षेत्रों के नीचे से अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन निकालने की योजना का कड़ा विरोध जताया गया है।

कब्रिस्तान प्रभावित होने की दलील

याचिका में स्पष्ट किया गया है कि यह कब्रिस्तान न केवल ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, बल्कि ये शहर के सबसे पुराने और विशाल कब्रिस्तानों में से एक हैं, जहां हजारों की संख्या में कब्रें मौजूद हैं। कमेटी का दावा है कि प्रस्तावित मेट्रो लाइन से लगभग एक एकड़ क्षेत्र सीधे तौर पर प्रभावित हो सकता है, जिससे बड़ी संख्या में कब्रों के अस्तित्व और उनकी संरचना पर गंभीर खतरा उत्पन्न होगा। यह आशंकाएं तब और बढ़ जाती हैं जब मेट्रो प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों ने अब तक इस क्षेत्र का विस्तृत नक्शा, कोई तकनीकी रिपोर्ट या सुरक्षा आकलन सार्वजनिक नहीं किया है।

दूसरा मामला

नारियलखेड़ा स्थित वक्फ निशात अफजा (वाके बाग) की जमीन से जुड़ा है, जहां मेट्रो निर्माण कार्य को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। याचिका के अनुसार, खसरा नंबर 88 की लगभग 11.93 हेक्टेयर भूमि वक्फ संपत्ति के रूप में विधिवत दर्ज है, जिसका पंजीयन वक्फ रजिस्टर में मौजूद है और राजपत्र में भी प्रकाशित किया जा चुका है।

बिना अनुमति के निर्माण शुरू किया

कमेटी का दावा है कि इस जमीन का एक बड़ा हिस्सा उनके प्रबंधन और नियंत्रण में है, बावजूद इसके मेट्रो कंपनी ने बिना किसी वैध अनुमति के निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। आरोप है कि करीब 1.40 एकड़ वक्फ भूमि पर बड़े-बड़े गड्ढे खोदकर पिलर निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कमेटी का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई न केवल वक्फ संपत्ति पर सरासर अतिक्रमण है, बल्कि इससे भूमि की मूल स्थिति को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है।

चर्चा में क्यों है MP मेट्रो ?

मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कार्पोरेशन लिमिटेड (एमपीएमआरसीएल) ने घाटे से उबरने और अपनी आय बढ़ाने के लिए सेलिब्रेशन ऑन व्हील्स पॉलिसी की शुरुआत की है। इस नई योजना के तहत अब आम नागरिक मेट्रो कोच और स्टेशन परिसर में जन्मदिन, किटी पार्टी और प्री-वेडिंग शूट जैसे निजी कार्यक्रमों का आयोजन कर सकेंगे। इस आदेश की देश भर में चर्चा है। कुछ लोग इसे अच्छा कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं।

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