ट्विशा शर्मा केस: बेल्ट की जब्ती पर उठे सवाल, मां-बेटे को VIP ट्रीटमेंट देने वाली डिप्टी जेलर को हटाया
Ligature Belt Controversy: ट्विशा केस में फांसी में इस्तेमाल बताई गई बेल्ट की जब्ती प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं जेल में पूर्व जज गिरिबाला सिंह को कथित वीआईपी सुविधाएं देने पर कार्रवाई की गई है।
- Reported By: सुधीर दंडोतिया | Edited By: प्रीतेश जैन
ट्विशा शर्मा (फोटो सोर्स- नवभारत डिजाइन)
Twisha Sharma Death Case Update: राजधानी भोपाल में ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत की जांच में अब उस बेल्ट की जब्ती प्रक्रिया को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं, जिसे पुलिस ने फांसी में इस्तेमाल होने वाला लिगेचर बताया है। जांच दस्तावेजों के अनुसार 13 मई की सुबह 9:42 बजे पुलिस ने जिस बेल्ट को जब्त किया था, उसके पंचनामा में यह नहीं लिखा गया कि वह किसकी निशानदेही पर बरामद हुई। जबकि उसी दिन बाद में हुई अन्य सभी जब्तियों में संबंधित व्यक्ति का स्पष्ट उल्लेख दर्ज है।
घटनास्थल की तस्वीरों में दो अलग-अलग रिंग में दो बेल्ट लटकी दिखाई देने की बात भी सामने आई है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि पुलिस ने किस आधार पर एक विशेष बेल्ट को घटना से जोड़कर महत्वपूर्ण साक्ष्य माना। इसके अलावा पहली जब्ती में एक मोबाइल फोन और लैपटॉप भी बरामद किए गए थे, लेकिन दस्तावेजों में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ये सामान ट्विशा के होने की पहचान कैसे हुई और उनकी जानकारी पुलिस को किसने दी।
मेडिकल टीम को नहीं दी बेल्ट
मामले से जुड़े दस्तावेज बताते हैं कि जब्त की गई बेल्ट को पुलिस ने तीन दिन बाद एम्स भोपाल की मेडिकल टीम को उपलब्ध कराया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद पुलिस ने दावा किया कि इसी बेल्ट का इस्तेमाल फांसी लगाने में किया गया था। बाद में मामले की दोबारा मेडिकल जांच एम्स दिल्ली में कराई गई, लेकिन उस समय यह बेल्ट विशेषज्ञों को उपलब्ध नहीं कराई गई। बाद में एम्स दिल्ली की मांग पर इसे भेजा गया। फिलहाल अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है।
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किसकी निशानदेही पर जब्त हुई बेल्ट?
जांच रिकॉर्ड के अनुसार पहली जब्ती के बाद दोपहर 3:30 बजे दूसरी कार्रवाई की गई, जिसमें एक सैमसंग मोबाइल समर्थ सिंह की निशानदेही पर जब्त किया गया। इस दस्तावेज पर समर्थ के हस्ताक्षर भी दर्ज हैं। इसके बाद शाम 4:40 बजे और फिर 6:40 बजे की गई जब्तियों में भी संबंधित व्यक्तियों के नाम और हस्ताक्षर शामिल हैं। 23 मई को हुई एक अन्य जब्ती में गिरिबाला सिंह की निशानदेही का उल्लेख किया गया है। इसके विपरीत सबसे पहली और अहम जब्ती में किसी व्यक्ति की निशानदेही दर्ज नहीं होना चर्चा का विषय बना हुआ है।
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
ट्विशा के परिजनों के वकील अंकुर पांडे ने आरोप लगाया है कि बेल्ट बरामद करने वाले एसआई दिनेश शर्मा ने इसे कई दिनों तक अपनी निजी कार में रखा था। उनका कहना है कि बाद में यह बेल्ट एम्स भोपाल को सौंपी गई। मामले में पुलिस अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
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VIP ट्रीटमेंट देने वाली डिप्टी जेलर को हटाया
उधर, इस प्रकरण में जेल प्रशासन ने भी कार्रवाई की है। भोपाल सेंट्रल जेल में बंद पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को कथित तौर पर विशेष सुविधाएं दिए जाने के मामले में डिप्टी जेलर जया यादव को उनके दायित्व से हटा दिया गया है। जेल विभाग के अधिकारियों की जांच में यह तथ्य सामने आने की बात कही जा रही है कि नियमों के विपरीत उन्हें अस्पताल वार्ड में रखा गया था। मामले की विस्तृत रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई है।
