

CM Sugam Parivahan Seva : मध्य प्रदेश में करीब 20 साल बाद राज्य सरकार की बस सेवा एक बार फिर शुरू होने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी 25 सितंबर को भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में ‘सुगम परिवहन सेवा’ का शुभारंभ करेंगे। नई व्यवस्था के तहत प्रदेश में इंटरसिटी और इंट्रासिटी दोनों तरह की बसें संचालित की जाएंगी।
नई बस सेवा का उद्देश्य प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करना और यात्रियों को सुविधाजनक व भरोसेमंद यात्रा विकल्प उपलब्ध कराना है। इंटरसिटी बसें दो या उससे अधिक शहरों को आपस में जोड़ेंगी, जबकि इंट्रासिटी बसें शहरों के भीतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने का काम करेंगी। इससे शहरी और शहरों के बीच आवागमन के लिए लोगों को अतिरिक्त विकल्प मिल सकेंगे।
नई बसों में यात्रियों की सुरक्षा और बसों की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। बसों में GPS और पैनिक बटन लगाए जाएंगे। GPS के जरिए बसों की लाइव लोकेशन ट्रैक की जा सकेगी, वहीं किसी आपात स्थिति में यात्री पैनिक बटन का इस्तेमाल कर सकेंगे।
परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के मुताबिक, GPS से बसों की लाइव ट्रैकिंग संभव होगी और पैनिक बटन आपात स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने में मदद करेगा। उन्होंने बताया कि इंटरसिटी सेवा शहरों को जोड़ेगी, जबकि इंट्रासिटी सेवा शहरी परिवहन को मजबूत करेगी।
राज्य सरकार ने अगले पांच वर्षों में बसों का बेड़ा बढ़ाकर 15 हजार बसों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए हर साल करीब 2,500 से 3,000 नई बसें जोड़े जाने की योजना है। सरकार का मानना है कि इससे प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में सार्वजनिक परिवहन के विकल्प बढ़ेंगे।
बस सेवा के साथ ड्राइवरों के प्रशिक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है। ड्राइवरों को आधुनिक तकनीक, यातायात सुरक्षा मानकों और इलेक्ट्रिक व CNG बसों के संचालन की ट्रेनिंग दी जा रही है। इंदौर और छिंदवाड़ा में Institutes of Driving Training and Research (IDTR) स्थापित किए जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत भोपाल, बैतूल, छतरपुर, उज्जैन और ग्वालियर में पांच क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा प्रदेश में 22 जिला स्तरीय प्रशिक्षण केंद्र भी जल्द स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों में ड्राइवरों को आधुनिक तकनीक, यातायात सुरक्षा नियमों और इलेक्ट्रिक व CNG बसों के संचालन की जानकारी दी जाएगी। सरकार के मुताबिक, प्रशिक्षण व्यवस्था से नई बस सेवा का संचालन सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।