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रीवा के रोझौही गांव में प्रस्तावित परमाणु प्लांट के विरोध में ग्रामीणों ने अनिश्चितकालीन जल सत्याग्रह शुरू किया।
ग्रामीणों ने साफ कहा कि वे गांव में परमाणु प्लांट नहीं लगने देंगे।
टाटा पावर की प्रस्तावित 2×220 मेगावाट परियोजना में करीब 28 हजार करोड़ रुपये के निवेश की बात सामने आई है।
जिला प्रशासन के अनुसार, परियोजना के लिए टाटा पावर को अभी जमीन आवंटित नहीं की गई है।
Jal Satyagraha in Rewa : रीवा जिले के लालगांव क्षेत्र के रोझौही गांव में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर विरोध तेज हो गया है। ग्रामीणों ने परियोजना के खिलाफ अनिश्चितकालीन जल सत्याग्रह शुरू कर दिया है। पानी में उतरकर प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि वे अपने गांव में न्यूक्लियर प्लांट नहीं लगने देंगे।
उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों और आशंकाओं पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता तब तक आंदोलन जारी रखेंगे।
ग्रामीणों के मुताबिक रोझौही क्षेत्र में टाटा पावर कंपनी की ओर से 2×220 मेगावाट क्षमता वाली प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर शुरुआती गतिविधियां शुरू हुई हैं। इस परियोजना में करीब 28 हजार करोड़ रुपये के निवेश का उल्लेख किया जा रहा है। हालांकि जिला प्रशासन का कहना है कि अभी कंपनी को परियोजना के लिए जमीन आवंटित नहीं की गई है। फिलहाल प्रारंभिक जांच और सर्वेक्षण की गतिविधियों को लेकर विवाद बना हुआ है।
बीते दिनों प्रस्तावित परियोजना स्थल पर भूवैज्ञानिक जांच के लिए बोरिंग मशीनें पहुंचीं तो रोझौही, सरई कला और आसपास के गांवों के ग्रामीण विरोध करने पहुंच गए। ग्रामीणों ने मशीनों से होने वाले काम को रोकने की मांग की। उनका सवाल है कि जब ग्रामसभा में परियोजना के विरोध में प्रस्ताव पारित किए जा चुके हैं तो उनकी आपत्तियों का समाधान किए बिना जांच की प्रक्रिया क्यों आगे बढ़ाई जा रही है।
रीवा जिले में इस परियोजना के विरोध में ग्राम पंचायत सरई कला में भी प्रस्ताव पारित किए जाने की बात सामने आई है। वहीं, सरपंच के नाम पर जारी कथित अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) की वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संबंधित दस्तावेज की जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों को परमाणु संयंत्र से संभावित पर्यावरणीय प्रभाव, विकिरण, परमाणु कचरे और जल संसाधनों को लेकर चिंता है। वे जमीन, खेती, स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर परियोजना के संभावित असर की जानकारी चाहते हैं। इन आशंकाओं का आकलन वैज्ञानिक अध्ययन और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर किया जाना जरूरी होगा।
विरोध के बीच रीवा कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी चिंताओं को समझने का प्रयास किया लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर कायम हैं। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी से जुड़े नेताओं की गतिविधियां भी सामने आई हैं। अब प्रशासन के सामने ग्रामीणों की आपत्तियों, परियोजना की प्रारंभिक प्रक्रिया और क्षेत्र में जारी आंदोलन के बीच समाधान निकालने की चुनौती है।