

Highlights:
देवास में टीआई दिलीप पुरी की मौत से फिर चर्चा में शराब और रेत माफिया।
मध्य प्रदेश में अधिकारियों पर कई बार हो चुके हमले।
मुरैना में 2026 में वनरक्षक हरिकेश गुर्जर की हत्या।
शहडोल में पटवारी और ASI की मौत के मामले भी चर्चा में।
MP Sand Liquor Mafia Attacks : मध्य प्रदेश में शराब और रेत माफिया के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। इनके हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि ये पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की जान लेने से भी नहीं कतरा रहे हैं। ताजा मामला देवास का है, जहां शराब परिवहन कर रहे एक ट्रक की चेकिंग के दौरान TI दिलीप पुरी को कुचल दिया गया। आरोप है कि TI द्वारा ट्रक को रोकने के दौरान ड्राइवर ने ट्रक की रफ्तार बढ़ा दी, जिससे TI उसकी चपेट में आ गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
ये पहला मामला नहीं है, जब रेत या शराब के अवैध परिवहन पर कार्रवाई करने पहुंचे पुलिस या प्रशासनिक अधिकारी की इस तरह से जान गई हो। इससे पहले भी मध्य प्रदेश में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें रेत या शराब माफिया पर कार्रवाई के दौरान अधिकारियों की हत्याएं या उन पर जानलेवा हमले किए गए हैं। हाल की इस घटना ने अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई करने वाले मैदानी अमले की सुरक्षा पर चिंता बढ़ा दी है।
8 अप्रैल 2026 को मुरैना जिले में अवैध रेत परिवहन रोकने की कार्रवाई के दौरान वनरक्षक हरिकेश गुर्जर की ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलकर मौत हो गई थी। वन विभाग की टीम चंबल नदी से रेत लेकर जा रहे वाहन को रोकने पहुंची थी। इस मामले का उल्लेख सुप्रीम कोर्ट में अवैध खनन से जुड़े प्रकरण की सुनवाई के दौरान भी हुआ था।
इसी तरह शहडोल जिले में भी अवैध रेत परिवहन रोकने के दौरान दो सरकारी कर्मचारियों की जान जा चुकी है। नवंबर 2023 में सोन नदी क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन रोकने पहुंचे पटवारी प्रसन्न सिंह बघेल को ट्रैक्टर-ट्रॉली ने कुचल दिया था। इसके बाद मई 2024 में ब्यौहारी क्षेत्र में सहायक उप निरीक्षक महेंद्र बागड़ी की भी रेत से लदे ट्रैक्टर की चपेट में आने से मौत हो गई।
जनवरी 2026 में शहडोल के ब्यौहारी क्षेत्र में नायब तहसीलदार शनि द्विवेदी ने अवैध खनन की गतिविधियों को रोकने के दौरान अपनी सरकारी गाड़ी को टक्कर मारने और उन पर हमला करने की शिकायत की थी। बाद में उन्होंने अपनी निगरानी किए जाने की आशंका भी जताई थी।
मुरैना जिले के बानमोर में मार्च 2012 में आईपीएस अधिकारी नरेंद्र कुमार सिंह की ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलकर मौत हो गई थी। वह अवैध पत्थर परिवहन रोकने की कोशिश कर रहे थे। इस घटना ने पूरे देश का ध्यान मध्य प्रदेश में अवैध खनन के कारोबार की ओर खींचा था। उसी दौरान भिंड में अवैध शराब की बिक्री रोकने पहुंचे आईपीएस अधिकारी जयदेवन पर भी शराब माफिया से जुड़े लोगों ने हमला किया था।
सवाल है कि आखिर रेत और शराब माफिया पर सरकार का शिकंजा मजबूत क्यों नहीं हो पा रहा? क्या करोड़ों के इस अवैध कारोबार के पीछे आर्थिक ताकत, विभागीय मिलीभगत या राजनीतिक संरक्षण है? कार्रवाई और गिरफ्तारियों के बावजूद माफिया का नेटवर्क दोबारा सक्रिय हो जाता है। जरूरत सिर्फ वाहन पकड़ने की नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क और उसके मददगारों तक पहुंचने की है। जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक अधिकारियों की जान पर खतरा बना रहेगा।