मध्यप्रदेश के 24 हजार पटवारियों का सरकार को अल्टीमेटम, 15 से 17 जुलाई तक सामूहिक अवकाश पर रहेंगे
MP Patwari Union : मध्यप्रदेश के 24 हजार पटवारियों ने 15 से 17 जुलाई तक तीन दिन के सामूहिक अवकाश का ऐलान किया है। 5 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार को अल्टीमेटम दिया गया है।
- Reported By: सुधीर दंडोतिया | Edited By: प्रीतेश जैन
पटवारी संघ (फोटो सोर्स- नवभारत)
MP Patwari Strike July 2026: मध्यप्रदेश के करीब 24 हजार पटवारी अपनी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर आंदोलन की राह पर हैं। मध्यप्रदेश पटवारी संघ ने ऐलान किया है कि यदि चार दिनों के भीतर उनकी मांगों पर सरकार ने ठोस निर्णय नहीं लिया, तो प्रदेशभर के पटवारी 15 से 17 जुलाई तक तीन दिवसीय सामूहिक सांकेतिक अवकाश पर रहेंगे। अवकाश के चलते लगातार पांच दिन तक राजस्व संबंधी कार्य प्रभावित रहने की संभावना है।
पटवारी संघ के प्रांताध्यक्ष उपेंद्र बाघेल ने बताया कि संगठन कई वर्षों से अपनी मांगों को लेकर शासन से लगातार आग्रह करता आ रहा है, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1996 के बाद से न तो कैडर रिव्यू हुआ है और न ही वेतन पुनरीक्षण किया गया है। इसके अलावा पदोन्नति और स्थानांतरण नीति को लेकर भी लंबे समय से असंतोष बना हुआ है।संघ ने आंदोलन की आगे की रणनीति तय करने के लिए 12 जुलाई को भोपाल में प्रदेश स्तरीय बैठक बुलाई है। बैठक में आगामी आंदोलन की रूपरेखा पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
पटवारी संघ की 5 प्रमुख मांगें
पटवारी संघ ने सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें कैडर रिव्यू लागू करना और पदोन्नति या समयमान वेतनमान देना, नायब तहसीलदार पद के लिए नियमित विभागीय परीक्षा आयोजित करना, राजस्व मामलों में कार्यरत पटवारियों को जज प्रोटेक्शन एक्ट जैसी कानूनी सुरक्षा प्रदान करना, विभिन्न सरकारी योजनाओं में किए गए कार्यों का लंबित मानदेय भुगतान करना तथा नियम विरुद्ध स्थानांतरण निरस्त कर पारदर्शी तबादला नीति लागू करना शामिल है।
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भेदभाव का आरोप
मध्यप्रदेश पटवारी संघ के प्रदेश संवाद समिति अध्यक्ष राजीव जैन ने कहा कि प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर मुख्यमंत्री मोहन यादव के नाम ज्ञापन सौंपकर विरोध दर्ज कराया गया है। उनका आरोप है कि अन्य विभागों के कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिल रहा है, जबकि पटवारी संवर्ग की लंबे समय से उपेक्षा की जा रही है।
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संघ की चेतावनी
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि 15 से 17 जुलाई के सांकेतिक अवकाश के बाद भी सरकार ने मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो प्रदेशव्यापी चरणबद्ध और व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
