मध्य प्रदेश में मितव्ययिता की नई नीति, अफसरों की यात्राओं और खर्चों पर सरकार ने दिखाई सख्ती
MP Officers Travel Rules : सरकार ने मितव्ययिता नीति लागू करते हुए अधिकारियों की यात्राओं, निजी होटलों में ठहरने और अनावश्यक खर्चों पर सख्ती की है। अब प्रदेश से बाहर जाने के लिए पूर्व अनुमति लेनी होगी।
- Reported By: सुधीर दंडोतिया | Edited By: प्रीतेश जैन
मुख्यमंत्री मोहन यादव (फोटो सोर्स- नवभारत)
MP Government Austerity Measures: वैश्विक आर्थिक चुनौतियों, ऊर्जा संरक्षण और सरकारी खर्चों में कटौती के उद्देश्य से मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर सख्त मितव्ययिता नीति लागू करने का फैसला किया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी निर्देशों के तहत अधिकारियों की सरकारी यात्राओं, आवास व्यवस्था और अन्य खर्चों पर नियंत्रण के लिए कई नए नियम लागू किए गए हैं।
अवर सचिव सचिंद्र राव द्वारा जारी सर्कुलर में कहा गया है कि सरकारी संसाधनों के बेहतर उपयोग और अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाने के लिए सभी विभागों को निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। सरकार का मानना है कि इससे प्रशासनिक खर्चों में कमी आएगी और संसाधनों का उपयोग जनहित से जुड़े कार्यों में किया जा सकेगा।
प्रदेश से बाहर यात्रा के लिए लेनी होगी अनुमति
नई व्यवस्था के तहत भारसाधक सचिव स्तर से नीचे के अधिकारी अब बिना पूर्व अनुमति के सरकारी खर्च पर राज्य से बाहर यात्रा नहीं कर सकेंगे। ऐसी यात्राओं के लिए संबंधित अधिकारियों को भारसाधक सचिव की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। वहीं सचिव स्तर के अधिकारियों को भी प्रदेश से बाहर जाने के लिए मुख्य सचिव की अनुमति लेनी होगी। इसके अलावा सभी बाहरी दौरों का मासिक विवरण मुख्य सचिव कार्यालय को उपलब्ध कराना होगा।
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निजी होटलों में ठहरने पर रोक
मध्य प्रदेश सरकार ने अधिकारियों के निजी होटलों में ठहरने पर भी सख्ती दिखाई है। सरकारी कार्य से दिल्ली, मुंबई या अन्य शहरों में जाने वाले वरिष्ठ अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर सरकारी आवास या राज्य भवनों में ठहरने की व्यवस्था करनी होगी। इसके लिए आवासीय आयुक्त की सहायता लेने के निर्देश दिए गए हैं।
ऑनलाइन बैठकों को मिलेगा बढ़ावा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन बैठकों का आयोजन वर्चुअल माध्यम से किया जा सकता है, उनके लिए अधिकारियों की अनावश्यक यात्रा नहीं कराई जाएगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ऑनलाइन मीटिंग को प्राथमिकता देने के निर्देश जारी किए गए हैं।
सार्वजनिक परिवहन और ई-व्हीकल पर जोर
ऊर्जा बचत और ईंधन खपत कम करने के उद्देश्य से विभागों को सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों को सरकारी वाहनों के स्थान पर सार्वजनिक परिवहन अथवा इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
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प्रधानमंत्री की अपील के बाद उठाया कदम
सरकार का यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन बचत, संसाधनों के बेहतर उपयोग और सरकारी खर्चों में कटौती को लेकर दिए गए सुझावों की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इससे पहले कई मंत्री और जनप्रतिनिधि भी अपने काफिलों में वाहनों की संख्या कम कर चुके हैं। अब प्रशासनिक अमले को भी इसी नीति के तहत कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
