

MP Corporation Board Performance Review: मध्यप्रदेश में हाल ही में राजनीतिक नियुक्तियां पाने वाले निगम-मंडलों, प्राधिकरणों, बोर्डों, परिषदों और आयोगों के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष अब नियमित मूल्यांकन के दायरे में रहेंगे। सरकार और संगठन ने पहली बार ऐसी व्यवस्था तैयार की है, जिसके तहत सभी पदाधिकारियों को हर छह महीने में अपनी परफॉर्मेंस रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। रिपोर्ट में जनता के हित में किए गए कार्यों, भविष्य की कार्ययोजना तथा संबंधित संस्थाओं में किए गए सुधारों का विस्तृत ब्यौरा देना होगा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव की मंशा के अनुरूप सत्ता और संगठन ने इन नियुक्तियों को केवल राजनीतिक संतुलन तक सीमित न रखकर उन्हें जनसेवा और सुशासन से जोड़ने का निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार, जिन पदाधिकारियों के खिलाफ लगातार और गंभीर शिकायतें मिलेंगी या जिनका प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहेगा, उन्हें पद से हटाया भी जा सकता है।
नई गाइडलाइन के तहत निगम-मंडलों के किसी भी अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को नियमों के उल्लंघन अथवा कार्यशैली में खामियां पाए जाने पर अधिकतम तीन बार समझाइश दी जाएगी। इसके बाद भी सुधार नहीं होने पर उन्हें पद से हटाने की कार्रवाई की जा सकती है। जल्द ही सभी नियुक्त पदाधिकारियों को इस संबंध में औपचारिक रूप से अवगत कराया जाएगा।
सत्ता और संगठन ने फिलहाल 30 से अधिक निगम-मंडलों, प्राधिकरणों, बोर्डों, परिषदों और आयोगों में राजनीतिक नियुक्तियों को होल्ड पर रखा है। इन पदों को भविष्य की राजनीतिक और संगठनात्मक आवश्यकताओं के अनुसार भरा जाएगा। इनमें नीति एवं योजना आयोग, सामान्य निर्धन कल्याण आयोग, पिछड़ा वर्ग आयोग सहित कई महत्वपूर्ण संस्थाएं शामिल हैं।
नई व्यवस्था में मितव्ययिता को विशेष महत्व दिया गया है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा खर्चों में संयम बरतने की सलाह के बाद सरकार ने भी इसे गंभीरता से लिया है। निर्धारित नियमों से हटकर अनावश्यक खर्च करने या फिजूलखर्ची में रुचि दिखाने वाले पदाधिकारियों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। ऐसे मामलों में पहले चेतावनी और बाद में कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का मानना है कि निगम-मंडल, बोर्ड और आयोग सीधे जनता से जुड़े होते हैं, इसलिए प्रत्येक संस्था को जनता की समस्याएं सुनने के लिए प्रभावी मंच विकसित करना होगा। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और अन्य शिकायत माध्यमों पर मिलने वाली शिकायतों की नियमित समीक्षा होगी। शिकायतों के निराकरण में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित पदाधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
अध्यक्ष और उपाध्यक्षों को सरकार तथा संगठन दोनों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर कार्य करना होगा। यदि किसी स्तर पर समन्वय की कमी या संगठनात्मक अनुशासनहीनता सामने आती है तो पहले चेतावनी दी जाएगी। बार-बार गलती दोहराने या संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में कार्रवाई की जाएगी।
सरकार और संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी पदाधिकारी के विवादित या सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने वाले बयान बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। ऐसे बयानों का रिकॉर्ड रखा जाएगा और गंभीर मामलों में बिना किसी नरमी के सीधे कार्रवाई की जा सकती है। पदाधिकारियों को गरिमा और अनुशासन के दायरे में रहकर ही सार्वजनिक बयान देने होंगे।
चूंकि संबंधित विभागों की अंतिम जिम्मेदारी मंत्रियों की होती है, इसलिए अध्यक्ष और उपाध्यक्षों को विभागीय मंत्रियों को विश्वास में लेकर काम करना होगा। यदि किसी संस्था में अंदरूनी खींचतान, टकराव या कार्य में बाधा की स्थिति बनती है और मंत्री इसकी शिकायत करते हैं तो उसे नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों को सीधे कार्रवाई के दायरे में लाने की तैयारी है।