

Umang Singhar Raises Clean Water Issue In Indore: भागीरथपुरा दूषित जलकांड की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार और इंदौर नगर निगम पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सिंघार ने कहा कि इंदौर को लगातार स्वच्छता के अवार्ड मिलते रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या शहर की जनता को स्वच्छ पानी पीने का अधिकार नहीं है।
उमंग सिंघार ने कहा कि घटना के करीब आठ महीने बाद भी नगर निगम यह मॉनिटरिंग नहीं कर पा रहा है कि दूषित पानी आखिर कहां से आ रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि क्या उनके पास इंदौर की जनता के लिए समय नहीं है।
उमंग सिंघार ने दावा किया कि नगर निगम की रिपोर्ट में शहर के कई अस्पतालों के पानी के साफ नहीं होने की बात सामने आई है, जांच रिपोर्ट में किसी राजनीतिक व्यक्ति की जवाबदारी तय नहीं की गई है। जबकि संविधान का अनुच्छेद 21 जीवन और गरिमा से जुड़े अधिकारों की रक्षा करता है और मूलभूत सुविधाओं की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों की भी है। भागीरथपुरा जांच आयोग की रिपोर्ट में पेयजल और सीवरेज नेटवर्क की लंबे समय से चली आ रही खामियों, निगरानी की कमी और पाइपलाइन बदलने में देरी का उल्लेख किया गया है।
उमंग सिंघार ने नगर निगम के करीब 8,500 करोड़ रुपये के बजट का उल्लेख करते हुए कहा कि इंदौर में महापौर, विधायक और प्रदेश में बीजेपी की सरकार होने के बावजूद जनता को साफ पानी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वोट लेना चाहती है, लेकिन लोगों को साफ पानी नहीं देना चाहती। सिंघार ने विधानसभा में पीने के पानी को लेकर सरकार द्वारा दिए गए जवाब पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि सरकार नहीं चाहती थी कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हो।
सिंघार ने कहा कि जांच में पेयजल के दूषित होने की पुष्टि हुई है और पूरे प्रोजेक्ट के ब्लूप्रिंट तक उपलब्ध नहीं कराए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले जांच आयोग को भी दस्तावेज उपलब्ध कराने में सहयोग नहीं किया गया। जांच रिपोर्ट में पुराने जलापूर्ति और सीवर नेटवर्क से जुड़े मूल नक्शे सहित कुछ रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने और पाइपलाइन बदलने की प्रक्रिया में लंबी देरी का उल्लेख सामने आया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाइपलाइन बदलने की प्रक्रिया में कुल 859 दिन लगे।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि जांच रिपोर्ट में सिर्फ अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई और जनप्रतिनिधियों को बचाया गया। उन्होंने सवाल किया कि आखिर पूरे मामले की राजनीतिक जवाबदारी किसकी थी। सिंघार ने यह भी सवाल उठाया कि एक ओवरहेड टैंक पर छह लोग तैनात होने के बावजूद पानी में केमिकल मिलाने की प्रक्रिया से जुड़े जिम्मेदार व्यक्ति से सख्ती से पूछताछ क्यों नहीं की गई। उन्होंने महापौर के स्तर पर फाइल 66 दिन रोके जाने का आरोप लगाते हुए कंपनी से कथित लेनदेन को लेकर भी सवाल उठाए।
उमंग सिंघार ने पीड़ित परिवारों को दिए गए मुआवजे को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार ने नाम का मुआवजा दिया और प्रदेश में लगातार ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने बालाघाट और सागर की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि अलग-अलग मामलों में सिस्टम की लापरवाही सामने आ रही है और इन सभी मामलों में सरकार की जवाबदारी बनती है।
उमंग सिंघार ने कहा कि इस रिपोर्ट में सरकार इंदौर की जनता के साथ खेल रही है, उमंग ने कहा कि 8 हजार करोड़ की निगम में कई घोटाले है, एक नया सिस्टम चालू हो गया है कि संविधान हटाओ फिर देश चलेगा, उमंग सिंघार ने कहा कि अस्पतालों में दूषित पानी आ रहा है, 8 महीने के अंदर पानी नहीं दे पा रहा है, महापौर को इसके लिए इस्तीफा दे देना चाहिए।