

Digvijaya Singh Satya Sanatan Yatra : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने दशहरे से ‘सत्य सनातन यात्रा’ शुरू करने का ऐलान किया है। भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने बताया कि यात्रा 20 अक्टूबर से शुरू होगी।
दिग्विजय सिंह ने इसे धार्मिक होने के साथ-साथ अराजनीतिक यात्रा बताया। हालांकि, यात्रा को लेकर उस वक्त सियासी चर्चा तेज हो गई, जब एक पत्रकार ने उनके पोस्टर में भगवा रंग दिखाई नहीं देने को लेकर सवाल किया। इस पर दिग्विजय सिंह ने जवाब दिया- “हरा रंग तो है।” उनका जवाब सुनकर वहां मौजूद लोग हंस पड़े।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे पहले नर्मदा यात्रा कर चुके हैं और राहुल गांधी की यात्रा भी हो चुकी है। अब वे ‘सत्य सनातन यात्रा’ निकालने जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि यात्रा 20 अक्टूबर से शुरू होगी। उनके मुताबिक, यात्रा में धर्म ध्वजा के रूप में पांच रंग का झंडा और राष्ट्रीय ध्वज भी शामिल रहेगा। उन्होंने कहा कि सनातन का अर्थ अनंत है और सनातन धर्म विश्व का सबसे बड़ा धर्म है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकार ने दिग्विजय सिंह से यात्रा के पोस्टर में भगवा रंग नजर नहीं आने को लेकर सवाल किया। इस पर दिग्विजय सिंह ने कहा, “हरा रंग तो है।” उनके इस जवाब के बाद वहां मौजूद लोगों के बीच हंसी का माहौल बन गया। अब दिग्विजय सिंह के इस बयान को लेकर सियासी प्रतिक्रिया आने के आसार हैं।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि भाजपा ने सनातन को केवल हिंदू-हिंदू तक सीमित कर दिया है। उन्होंने सनातन की व्यापक अवधारणा का जिक्र करते हुए कहा कि सनातन का अर्थ अनंत है। उन्होंने महाकाल और अयोध्या में कथित चोरी के मामलों का भी जिक्र किया। दिग्विजय सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने घर के सामने ‘चंदा चोर, इस घर में आपका प्रवेश निषेध है’ का बैनर लगाया है।
दिग्विजय सिंह ने ‘वोट चोरी और चंदा चोरी’ को लेकर डिजिटल पिटिशन लॉन्च करने की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि लोग मिस्ड कॉल के जरिए अपने विचार और शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। ईवीएम को लेकर उन्होंने कहा कि वह 2019 से इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने एसआईआर को लेकर भी सवाल उठाए और हाल में हुई घटना की निंदा की।
सत्य सनातन यात्रा को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिग्विजय सिंह ने केंद्र सरकार और आरएसएस पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि अमित शाह के गृह मंत्री रहते जिस तरह काम हो रहा है, उससे लोकतंत्र कमजोर हो रहा है। उन्होंने आरएसएस की विचारधारा को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चुनौती बताया। दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे गांधी की विचारधारा को मानते हैं और आरएसएस की विचारधारा का विरोध करते हैं।
दिग्विजय सिंह ने महात्मा गांधी की हत्या और सावरकर व आरएसएस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरएसएस के पंजीकरण और उसके आर्थिक स्रोतों को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखने की बात कही। उन्होंने कोविड काल में आरएसएस द्वारा सात करोड़ रुपये दिए जाने संबंधी दावे का जिक्र करते हुए कार्रवाई की मांग की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि देश की संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाया जा रहा है और लोकतंत्र कमजोर हो रहा है।