मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दिया बड़ा बयान, कहा- बाबा महाकाल चाहेंगे तो विधानसभा के इसी सत्र में पास होगा UCC बिल
Mohan Yadav UCC Statement : विधानसभा के मानसून सत्र को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने और विधायी कार्यों को पूरा करने की बात कही। साथ ही UCC बिल पर भी बड़ा बयान दिया है
- Reported By: सुधीर दंडोतिया | Edited By: प्रीतेश जैन
मुख्यमंत्री मोहन यादव (फोटो सोर्स- नवभारत)
Mohan Yadav On MP Vidhansabha Session: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आगामी विधानसभा सत्र की शुरुआत से ठीक पहले एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार न केवल आगामी सत्र के लिए पूरी तरह तैयार है, बल्कि राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री ने मीडिया से बात करते हुए कहा हम विधानसभा सत्र को लेकर पूरी तरह तैयार हैं। सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तत्पर है। लेकिन इसके ठीक बाद उन्होंने जो कहा उसने राज्य की सियासत में हलचल तेज कर दी है। सीएम ने कहा हम UCC कानून की तरफ आगे बढ़ रहे हैं। बाबा महाकाल चाहेंगे तो इसी सत्र में यह बिल पास होगा।
महाकाल के नाम से सियासी गलियारों में हलचल
मुख्यमंत्री मोहन यादव का यह बयान धार्मिक और राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ‘बाबा महाकाल’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने यह साफ संकेत दे दिया है कि सरकार इस सत्र में यूसीसी (UCC) विधेयक को विधानसभा के पटल पर रखने की पूरी तैयारी में है। अगर सब कुछ तय रणनीति के मुताबिक रहा, तो इसी सत्र के दौरान मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता बिल को पारित कराया जा सकता है।
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उत्तराखंड के बाद MP में बड़ी तैयारी
गौरतलब है कि देश में उत्तराखंड पहला ऐसा राज्य है जिसने अपने यहां समान नागरिक संहिता (UCC) को कानूनी रूप दिया है। इसके बाद से ही मध्य प्रदेश समेत कई भाजपा शासित राज्यों में इसे लागू करने की मांग और तैयारियां चल रही थीं। सीएम मोहन यादव के इस ताजा बयान के बाद अब यह साफ हो गया है कि मध्य प्रदेश इस कानून को लागू करने वाला अगला राज्य बनने की रेस में सबसे आगे है।
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सत्र के हंगामेदार होने के आसार
मुख्यमंत्री के इस बड़े एलान के बाद आगामी मध्य प्रदेश विधानसभा सत्र के बेहद हंगामेदार रहने के आसार हैं। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति बना सकता है, वहीं सत्ता पक्ष इस ऐतिहासिक बिल को पास कराकर एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की तैयारी में है। अब देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इसी सत्र में इस बिल का मसौदा (Draft) पेश करती है या नहीं।
