मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र पर विवाद; छानबीन समिति के सामने आमने-सामने हुए पक्ष और विपक्ष

Pratima Bagri Certificate Case: मध्य प्रदेश की राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र पर छानबीन समिति के सामने हुई सुनवाई, कांग्रेस ने बताया राजपूत, मंत्री ने कहा राजनीतिक षड्यंत्र।
Political leaders continue to trade allegations over the caste certificate issue as the controversy surrounding Pratima Bagri remains in focus
प्रतिमा बागरी (सोर्स- सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Pratima Bagri SC Certificate Row: मध्य प्रदेश की नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र की वैधता को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सोमवार को इस मामले में अनुसूचित जाति (एससी) मामलों की छानबीन समिति के समक्ष महत्वपूर्ण सुनवाई हुई।

करीब एक घंटे तक चली इस प्रक्रिया में शिकायतकर्ता और मंत्री प्रतिमा बागरी दोनों ने अपने-अपने पक्ष विस्तार से रखे। समिति ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने के साथ ही प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों को भी रिकॉर्ड में लिया। अब इस पूरे मामले पर सभी की नजर समिति की आगामी कार्रवाई और रिपोर्ट पर टिकी हुई है।

कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार ने उठाए गंभीर सवाल

सुनवाई के दौरान कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र पर आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने दावा किया कि मंत्री का परिवार मूल रूप से राजपूत वर्ग से संबंधित है। अपने दावों के समर्थन में उन्होंने कई दस्तावेज समिति के समक्ष प्रस्तुत किए। अहिरवार ने तर्क दिया कि वर्ष 1950 के भारत सरकार के गजट में बागरी समुदाय अनुसूचित जाति की सूची में शामिल नहीं था।

प्रतिमा बागरी के समर्थन में जुटे लोग

उनका यह भी कहना था कि वर्ष 1977 में मध्य प्रदेश की अधिसूचना के बाद बागरी समुदाय की कुछ उपजातियों को अनुसूचित जाति और कुछ को राजपूत वर्ग में रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी बदलाव का लाभ उठाकर वर्ष 1981 की जनगणना में प्रतिमा बागरी के परिवार ने स्वयं को अनुसूचित जाति के रूप में दर्ज कराया। इस सुनवाई के दौरान उनके समर्थन में सतना और पन्ना से बड़ी संख्या में लोग भी भोपाल पहुंचे।

मंत्री प्रतिमा बागरी ने बताया राजनीतिक षड्यंत्र

राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे कांग्रेस की राजनीतिक साजिश बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक अनुसूचित जाति वर्ग की महिला के मंत्री बनने से असहज है और इसी कारण इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि वर्ष 1950 में मध्य प्रदेश राज्य का गठन ही नहीं हुआ था, इसलिए उस समय की अधिसूचना के आधार पर उनके जाति प्रमाण पत्र पर सवाल उठाना पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन है। उन्होंने विश्वास जताया कि समिति निष्पक्ष तरीके से सभी तथ्यों की जांच करेगी।

दस्तावेजों की होगी गहन जांच, रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

सुनवाई के बाद एससी मामलों की छानबीन समिति ने दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और तर्कों का विस्तृत परीक्षण करने की बात कही है। समिति का कहना है कि उपलब्ध अभिलेखों, सरकारी दस्तावेजों और कानूनी प्रावधानों का अध्ययन करने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा।

फिलहाल इस मामले में कोई निर्णय नहीं लिया गया है। समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को लेकर आगे क्या कार्रवाई की जाएगी और विवाद किस दिशा में आगे बढ़ेगा।

https://youtu.be/oeDcEuol6Ko?si=nmkiBnKMzmyh9cuK

Navbharat Live
navbharatlive.com