

Madhya Pradesh Cabinet Expansion : देश की राजधानी दिल्ली में इस समय मध्य प्रदेश की राजनीति को लेकर सरगर्मियां अपने चरम पर हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर राज्य और केंद्र सरकार में दखल रखने वाले तमाम कद्दावर नेता एक साथ दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। एक ही समय में इतने बड़े नेताओं की राजधानी में मौजूदगी ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है और कई बड़े सवालों को जन्म दे दिया है।
दिल्ली पहुंच रहे नेताओं की सूची काफी लंबी और वजनदार है। सूत्रों की मानें तो इनमें मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अलावा केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया को दिल्ली पहुंचने के निर्देश मिले हैं। राज्य सरकार के कद्दावर मंत्री प्रह्लाद पटेल और कैलाश विजयवर्गीय के साथ भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय सह-संगठन प्रभारी वी.डी. शर्मा भी दिल्ली में मौजूद हैं। राज्य के शीर्ष नेतृत्व का इस तरह एक साथ दिल्ली पहुंचना किसी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की ओर इशारा कर रहा है।
राजनीतिक पंडितों और सूत्रों की मानें तो इस भारी जमावड़े के पीछे सबसे बड़ी वजह मध्य प्रदेश में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार हो सकती है। लंबे समय से राज्य में मंत्रिमंडल के विस्तार और फेरबदल की चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि, जिस स्तर के नेता दिल्ली में मंथन कर रहे हैं, उसे देखते हुए यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी आलाकमान राज्य के लिए कोई बड़ा संगठनात्मक या रणनीतिक फैसला ले सकता है।
नेताओं के इस दिल्ली दौरे के बीच सबसे ज्यादा ध्यान भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वी.डी. शर्मा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मुलाकात ने खींचा है। वी.डी. शर्मा ने अमित शाह से यह अहम मुलाकात ऐसे समय में की है, जब मध्य प्रदेश को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। माना जा रहा है कि इस उच्चस्तरीय बैठक में मध्य प्रदेश के मौजूदा राजनीतिक हालात, संगठन की मजबूती और भविष्य की संभावित रणनीतियों पर चर्चा हुई है।
सियासी हलचल से इतर नेताओं का यह दौरा राज्य के विकास और निवेश के लिहाज से भी अहम है। इस दिल्ली प्रवास के दौरान मध्य प्रदेश के नेताओं की ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों के साथ भी अहम मुलाकात हुई है। इस कदम को मध्य प्रदेश में विदेशी निवेश आकर्षित करने, व्यापारिक संबंध मजबूत करने और विकास की नई संभावनाएं तलाशने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
फिलहाल मध्य प्रदेश की पूरी प्रशासनिक और राजनीतिक मशीनरी की नजरें इस वक्त दिल्ली पर टिकी हुई हैं। हर किसी को इस बात का इंतजार है कि शीर्ष नेतृत्व के साथ इन मुलाकातों और बैठकों के बाद दिल्ली से क्या निर्देश निकलते हैं। क्या यह सिर्फ विकास-केंद्रित दौरा था या जल्द ही मध्य प्रदेश की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा?