कोसमी में आदिवासियों के मकान तोड़ने के मामले में ST आयोग सख्त, 7 अधिकारियों से 3 दिन में मांगा जवाब

Kosmi Tribal Families Case : सीहोर के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़ने के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया। सात अधिकारियों से तीन दिन में जवाब मांगा।
National Commission for Scheduled Tribes notice
आदिवासियों के साथ शिवराज और ncst का नोटिसफोटो सोर्स- नवभारत
Published on: 
Updated on: 

Highlights:

  • कोसमी में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया।

  • मुख्य सचिव, डीजीपी और सीहोर कलेक्टर समेत सात अधिकारियों से तीन दिन में जवाब मांगा।

  • निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर आयोग अधिकारियों को समन जारी कर सकता है।

NCST Notice Sehor Case : सीहोर जिले के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव, वन विभाग के प्रमुख सचिव, पुलिस महानिदेशक सहित सात अधिकारियों को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब मांगा है। आयोग ने संबंधित अधिकारियों से मामले में लगाए गए आरोपों और अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी प्रस्तुत करने को कहा है।

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को 12 अक्टूबर 2026 को एक समाचार पत्र के माध्यम से कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के घर तोड़े जाने से संबंधित शिकायत और सूचना प्राप्त हुई थी। इसके बाद आयोग ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338क के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए मामले की जांच करने का निर्णय लिया। आयोग ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर निर्धारित समय में जवाब देने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव से लेकर वन विकास निगम के प्रबंध संचालक तक को नोटिस

आयोग ने मध्य प्रदेश शासन के मुख्य सचिव, वन विभाग के प्रमुख सचिव, पुलिस महानिदेशक, सीहोर कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी, सीहोर पुलिस अधीक्षक, वनमंडलाधिकारी सीहोर और राज्य वन विकास निगम के प्रबंध संचालक को नोटिस भेजा है। इन सभी अधिकारियों से मामले से जुड़े आरोपों, तथ्यों और की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी गई है।

तीन दिन में देनी होगी कार्रवाई की जानकारी

नोटिस के अनुसार, संबंधित अधिकारियों को सूचना प्राप्त होने के तीन दिनों के भीतर आयोग के समक्ष अपना जवाब प्रस्तुत करना होगा। जवाब डाक, व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर या किसी अन्य संचार माध्यम से भेजा जा सकता है। आयोग ने अधिकारियों से मामले में की गई कार्रवाई से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है।

जवाब नहीं मिलने पर समन जारी कर सकता है आयोग

आयोग ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि में जवाब प्राप्त नहीं होने पर वह संविधान के अनुच्छेद 338क के तहत उसे प्राप्त दीवानी न्यायालय की शक्तियों का इस्तेमाल कर सकता है। ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से या प्रतिनिधि के माध्यम से आयोग के समक्ष उपस्थित होने के लिए समन जारी किया जा सकता है।

National Commission for Scheduled Tribes notice
कोसमी में आदिवासियों के मकान तोड़ने पर CM मोहन यादव ने मांगी रिपोर्ट, बोले- दूध का दूध, पानी का पानी होगा

कोसमी मामले में अब आयोग की जांच पर नजर

कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला पहले ही राजनीतिक चर्चा में आ चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा मामले में सवाल उठाए जाने के बाद मुख्यमंत्री ने जांच की बात कही है। वहीं अब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के स्वतः संज्ञान लेने और सात अधिकारियों से जवाब तलब करने के बाद मामले में प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल आयोग ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। जांच और आगे की कार्रवाई का विवरण उनके जवाब मिलने के बाद स्पष्ट होगा।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com