बुधनी में प्रशासनिक कार्रवाई पर भड़के शिवराज सिंह चौहान; अपनी ही सरकार के खिलाफ देर रात धरने पर बैठे

Shivraj Singh Chouhan Protest: बुधनी के कोसमी में वन विभाग की कार्रवाई पर भड़के केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, अपनी ही सरकार के खिलाफ देर रात धरने पर बैठे। कार्रवाई को बताया 'नरपिशाच जैसा जुल्म।
Shivraj Singh Chouhan Opposes Administrative Action Budhni
शिवराज सिंह चौहान देर रात को धरने पर बैठ(सोर्स- नवभारत लाइव)
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Shivraj Singh Chouhan Opposes Administrative Action Budhni: मध्य प्रदेश के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोसमी गांव में वन विभाग और प्रशासन द्वारा की गई तोड़फोड़ की कार्रवाई के बाद सियासी भूचाल आ गया है।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान इस कार्रवाई से इस कदर भड़के कि वह अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए।

'जुल्म की पराकाष्ठा और नरपिशाच जैसी कार्रवाई'

देर रात धरने के दौरान कड़े शब्दों में नाराजगी जताते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उनके क्षेत्र में जुल्म की पराकाष्ठा हुई है। उन्होंने इस कार्रवाई को अंजाम देने वालों को 'नरपिशाच' करार दिया। उन्होंने दर्द बयां करते हुए कहा, "सवेरे तक जो घर आबाद थे, जहां बच्चों की किलकारियां गूंज रही थीं, वहां अब सिर्फ चीखें हैं। महिलाएं छातियां पीट-पीटकर रो रही हैं। उनके घर गिरा दिए गए, फसलें दबा दी गईं, मेहनत कुचल दी गई और कुएं तक मिट्टी से भर दिए गए।" केंद्रीय मंत्री ने सवाल उठाया कि बुलडोजर चलाने वालों को गरीबों के बच्चों और परिवारों का दर्द क्यों नहीं दिखाई देता?

शीर्ष अधिकारियों से बातचीत के बाद भी हुई कार्रवाई

शिवराज सिंह ने खुलासा किया कि यह कार्रवाई तब की गई, जब वे इसे रोकने के लिए पहले ही भारतीय जनता पार्टी के मध्य प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल से चर्चा कर चुके थे। उन्होंने कहा कि वे इस पूरी घटना की जानकारी और स्थिति मुख्यमंत्री के सामने रखेंगे तथा तोड़-फोड़ में शामिल फॉरेस्ट स्टाफ के दोषी कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग करेंगे। मौके पर किसी भी बड़े अधिकारी के मौजूद न होने पर भी उन्होंने गहरी नाराजगी जताई।

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पीड़ितों के लिए मदद का बड़ा ऐलान

केंद्रीय मंत्री ने मौके पर मौजूद पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाते हुए न्याय दिलाने की बात कही। उन्होंने घोषणा की:

  • जिन परिवारों के घर तोड़े गए हैं, उनके लिए नए पक्के घर बनवाए जाएंगे।

  • जब तक उनके रहने की स्थायी व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक उनके रहने और खाने-पीने का पूरा खर्च उठाया जाएगा।

प्रशासन और सरकार का पक्ष

दूसरी ओर, सरकार और प्रशासन की ओर से इस कार्रवाई पर सफाई दी गई है। सरकार का कहना है कि सीहोर के वन विकास निगम के वन कक्ष क्रमांक 426 में साल 2021 में प्लांटेशन (पौधरोपण) किया गया था। इस तय एरिया में सिंहपुर के 10 आदिवासी परिवारों ने कथित तौर पर प्लांटेशन को नष्ट कर वहां खेती शुरू कर दी थी और झोपड़ियां बना ली थीं।

प्रशासन के मुताबिक, इन सभी लोगों के खिलाफ पहले से ही वन अपराध (फॉरेस्ट क्राइम) का केस दर्ज था और सभी को नियमानुसार बेदखली का नोटिस भी दिया गया था। इन्हीं कानूनी प्रक्रियाओं के तहत अवैध झोपड़ियों को हटाने की कार्रवाई की गई है।

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