शिवराज सिंह चौहान ने 22 राज्यों के कृषि मंत्रियों की ली बैठक, 1 से 30 जून तक देशभर में चलेगा खेत बचाओ अभियान
Shivraj Singh Chouhan Meeting: दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 22 राज्यों के कृषि मंत्रियों की मीटिंग ली। केंद्र सरकार 1 से 30 जून तक देश में खेत बचाओ अभियान चलाने जा रही है।
- Reported By: सुधीर दंडोतिया | Edited By: प्रीतेश जैन
कृषि मंत्रियों की बैठक
Khet Bachao Abhiyan 2026: केंद्र सरकार 1 जून से 30 जून तक देशभर में ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाएगी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अभियान की तैयारियों को लेकर नई दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान का मुख्य उद्देश्य खेतों की उर्वरता बचाना, खेती की लागत कम करना तथा किसानों को समय पर सही मार्गदर्शन उपलब्ध कराना होना चाहिए।
नई दिल्ली स्थित कृषि अनुसंधान के प्रमुख केंद्र पूसा परिसर में 28 और 29 मई को आयोजित दो दिवसीय खरीफ कॉन्फ्रेंस में, देश के इतिहास में पहली बार 22 राज्यों के कृषि मंत्री एक साथ एक मंच पर जुटे और देश की कृषि और किसानों की जिंदगी बेहतर बनाने का संकल्प लिया। बैठक में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह अभियान केवल जागरूकता कार्यक्रम नहीं, बल्कि खेत, किसान और गांव को जोड़ने वाला राष्ट्रीय जनअभियान होगा। इसे पंचायत से लेकर राज्य और केंद्र स्तर तक साझी भागीदारी के मॉडल पर संचालित किया जाएगा।
किसानों को किया जाएगा जागरूक
अभियान के तहत रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग को कम करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। किसानों को मृदा परीक्षण आधारित संतुलित खाद उपयोग, हरी खाद, जैविक एवं जैव-उत्पादों के प्रयोग तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) के बारे में जागरूक किया जाएगा। खेत स्तर पर प्रदर्शन कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मौसम संबंधी चुनौतियों को देखते हुए किसानों को फसल चयन, फसल विविधीकरण, कम पानी वाली खेती और जोखिम प्रबंधन से जुड़ी व्यावहारिक सलाह दी जाएगी। अभियान का उद्देश्य केवल संदेश देना नहीं, बल्कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप किसानों को सीधा मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है।
सम्बंधित ख़बरें
उज्जैन: नौतपा के बीच बदला मौसम का मिजाज, बारिश और ओलावृष्टि से तापमान में गिरावट, लोगों को गर्मी से मिली राहत
सीहोर में बड़ा हादसा: श्रीमद्भागवत कथा के दौरान गिरा पंडाल, दबने से 30 श्रद्धालु घायल, मची अफरा-तफरी
MP Weather Update: नौतपा के बीच बदला मौसम, मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट
ट्विशा शर्मा की अस्थियों को गंगा में किया विसर्जित, पिता बोले- मेरी बेटी का ऋषिकेश से गहरा लगाव था
जनप्रतिनिधियों से भी सहयोग की अपील
अभियान में पंचायतों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। पंचायत स्तर पर कृषि मशीनरी वितरण, विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ और अन्य कृषि सेवाओं को भी अभियान से जोड़ा जाएगा, ताकि किसानों तक सुविधाएं सीधे पहुंच सकें। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि अभियान को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने के लिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों से भी सहयोग का आग्रह किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य इसे राष्ट्रीय स्तर का जनआंदोलन बनाना है।
1600 से ज्यादा टीमें गठित
बैठक में जानकारी दी गई कि अभियान के संचालन के लिए 1,600 से अधिक टीमें गठित की गई हैं। अधिक उर्वरक उपयोग वाले 100 जिलों में 500 विशेष टीमें कार्य करेंगी, जिनमें कृषि वैज्ञानिक, कृषि विभाग के अधिकारी तथा कृषि विशेषज्ञ शामिल होंगे। इसके अलावा, विभिन्न संस्थानों और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) की 1,150 से अधिक बहुविषयक टीमें भी समानांतर रूप से अभियान में भाग लेंगी।
ये भी पढ़ें : सीहोर में बड़ा हादसा: श्रीमद्भागवत कथा के दौरान गिरा पंडाल, दबने से 30 श्रद्धालु घायल, मची अफरा-तफरी
अभियान सिर्फ खाद प्रबंधन तक सीमित नहीं
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अभियान केवल खाद प्रबंधन तक सीमित नहीं रहेगा। इसके तहत किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम किसान योजना से वंचित किसानों को जोड़ना, दलहन-तिलहन मिशन, ऑयल पाम, कॉटन मिशन, मिट्टी स्वास्थ्य, जल संरक्षण और क्षेत्र-विशेष कृषि सलाह जैसी गतिविधियों को भी शामिल किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संदेश व्यवहारिक हो, स्थानीय स्तर पर दिखाई दे और किसान उससे सीधे जुड़ सकें। उनका कहना था कि “खेत बचे, लागत संभले, मिट्टी सुधरे, किसान जागरूक बने और गांव स्तर पर कृषि प्रबंधन की नई संस्कृति विकसित हो”—यही इस अभियान का मूल उद्देश्य है।
