MP में 1.20 लाख पद 'डाइंग कैडर' घोषित, यह सरकारी पद खत्म; नई नियुक्तियों पर पूर्म प्रतिबंध

MP News: सरकार ने 1.20 लाख सरकारी पदों को डाइंग कैडर घोषित कर दिया है। कार्यभारित, संविदा और आकस्मिकता निधि के पदों पर अब नई भर्तियां नहीं होंगी और आउटसोर्स कर्मचारियों को मार्च 2027 तक हटाया जाएगा।
MP Government Dying Cadre 1-20 Lakh Posts Recruitment Ban GAD News Update
MP में खत्म हुए 1.20 लाख पद (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Madhya Pradesh Dying Cadre Post News: मध्य प्रदेश के सामान्य प्रशासन विभाग ने अब प्रदेश के 1 लाख 20 हजार पदों को 'डाइंग कैडर' घोषित कर दिया है। बता दें कि अब इन पदों पर नई भर्तियां नहीं होंगी। कैबिनेट ने कार्यभारित, आकस्मिकता निधि और संविदा, कोटवार श्रेणी के पद समाप्त करने का फैसला किया था।

इस पर अमल के लिए सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने निर्देश जारी किए हैं। निर्देश में कहा है कि अगर किसी विभाग या कलेक्टर, विभाग अध्यक्ष ने इन पदों पर नियुक्तियां की तो उनके विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी। सरकार का दावा है कि वित्तीय बोझ कम करने के लिए यह कदम उठाया गया है।

इन पदों को किया गया समाप्त

जिन पदों को समाप्त किया गया है उनमें कार्यभारित श्रेणी के 16,810 पद, आकस्मिकता निधि के 55,808 पद तथा संविदा और कोटवार श्रेणी के 34,497 पद शामिल हैं। इसके अलावा निर्देशों में यह भी कहा गया है कि नियमित पदों पर कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को मार्च 2027 तक हटाया जाएगा और उनकी जगह पर नियमित भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्तियां की जाएंगी।

नियमित और संविदा पदों तक ही भर्ती सीमित

सामान्य प्रशासन विभाग के ताजा आदेश के बाद यह स्थिति स्पष्ट हो गई है कि मध्य प्रदेश में अब भर्ती व्यवस्था केवल नियमित और संविदा पदों तक ही सीमित रहेगी। इसके अलावा अन्य सभी श्रेणियों के पदों को समाप्त कर दिया गया है और भविष्य में इन पर किसी भी प्रकार की नई नियुक्ति नहीं होगी।

क्या है कार्यभारित पद?

जानकारी के अनुसार, कार्यभारित पदों का उपयोग सड़क, सिंचाई और भवन निर्माण जैसी परियोजनाओं में अस्थायी जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाता था। इसी तरह आकस्मिकता निधि से वेतन पाने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति भी अल्पकालिक वित्तीय प्रावधानों के तहत होती थी।

नियमों से विपरीत नियुक्ति पर होगी कार्रवाई

संविदा और कोटवार पदों पर तय अवधि के अनुबंध के आधार पर नियुक्तियां की जाती रही हैं। आदेश में यह भी साफ कहा गया है कि यदि समाप्त किए गए पदों पर नियमों के विपरीत किसी की नियुक्ति की जाती है, तो इसके लिए संबंधित कलेक्टर, कमिश्नर या विभागाध्यक्ष जिम्मेदार होंगे और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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