

दीपम रायचुरा निलंबित, आबकारी आयुक्त ने जारी किए आदेश।
2.75 करोड़ रुपए की कथित फर्जी ई-एफडीआर से शराब ठेका दिलाने का आरोप।
बैंक ने एफडीआर जारी करने से किया इनकार, जांच में मिलीं अनियमितताएं।
एक करोड़ रुपये रिश्वत लेने का आरोप, मोहित गोगिया के बयान से खुलासा।
Fake E-FDR In Bhopal Liquor Contract Case Bhopal: मध्य प्रदेश में आबकारी विभाग ने भोपाल के तत्कालीन प्रभारी सहायक आबकारी आयुक्त दीपम रायचुरा को निलंबित कर दिया है। रायचुरा उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के ओएसडी भी रह चुके हैं। उन पर करीब 2.75 करोड़ रुपये की कथित फर्जी इलेक्ट्रॉनिक फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद (ई-एफडीआर) स्वीकार कर भोपाल के न्यू मार्केट में दो शराब दुकानों का ठेका जसवंत नाम के व्यक्ति को दिलाने में सहयोग करने का आरोप है।
जांच में प्रथम दृष्ट्या अनियमितताएं सामने आने के बाद आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने सोमवार को निलंबन के आदेश जारी किए। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय आबकारी आयुक्त कार्यालय, ग्वालियर निर्धारित किया गया है।
यह मामला वित्तीय धोखाधड़ी के कई मामलों में दिल्ली में गिरफ्तार मोहित गोगिया के बयानों के बाद सामने आया। गोगिया ने जांच एजेंसियों को दिए बयान में आरोप लगाया था कि दीपम रायचुरा ने फर्जी एफडीआर के आधार पर शराब की दो दुकानें ठेके पर लेने में मदद की थी। उसने रायचुरा को एक करोड़ रुपये रिश्वत दिए जाने का आरोप भी लगाया था।
यह मामला वर्ष 2024-25 का है। मीडिया में खबरें सामने आने के बाद जगदीश देवड़ा ने रायचुरा को ओएसडी के दायित्व से मुक्त कर दिया था। इसके बाद 9 अक्टूबर को दो सदस्यीय जांच दल गठित किया गया।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की 2,75,53,535 रुपये की ई-एफडीआर स्वीकार की गई थी, जबकि बैंक ने लिखित रूप में ऐसी कोई एफडीआर जारी करने से इनकार किया। फाइल में जांच अधिकारी के कथित फर्जी हस्ताक्षर और गलत सत्यापन रिपोर्ट भी मिली। इसके अलावा, आबकारी नियमों के विपरीत स्मॉल फाइनेंस बैंक की गारंटी स्वीकार करने का मामला सामने आया।
लाइसेंसधारी को 1,37,76,768 रुपये की प्रत्याभूत ड्यूटी 30 अप्रैल 2024 तक जमा करनी थी, लेकिन भुगतान 12 मई को किया गया। इस देरी पर नियमानुसार कार्रवाई नहीं की गई।
जांच में मेसर्स मां माइंस फर्म के ट्रांसफर के दौरान बिना आधिकारिक पार्टनरशिप डीड की जांच किए विजय सिंह को पार्टनर मानने का मामला भी सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार, विजय सिंह आबकारी पोर्टल पर फर्म के पार्टनर के रूप में दर्ज नहीं थे। इसके बावजूद उनके व्यक्तिगत बैंक खाते से 76 लाख रुपये की बैंक गारंटी और पोस्ट-डेटेड चेक स्वीकार किए गए।
जांच दल ने इन मामलों को गंभीर अनियमितताओं के रूप में चिह्नित किया। प्रथम दृष्ट्या दोषी पाए जाने के बाद दीपम रायचुरा के निलंबन की कार्रवाई की गई है। मामले में सामने आए आरोपों और जांच निष्कर्षों के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।