Convoy Controversy: काफिले पर अलग-अलग सजा क्यों? 50 गाड़ियों पर पद गया, 200 पर सिर्फ नोटिस

Question On BJP Disciplinary Action: भाजपा में काफिला निकालने को लेकर अलग-अलग सजा पर सवाल उठ रहे हैं। 50 गाड़ियां लाने वाले की नियुक्ति रद्द हो गई, जबकि 200 गाड़ी वाले को सिर्फ नोटिस जारी हुआ है।
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सज्जन यादव और सौभाग्य सिंह (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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Bjp Convoy Controversy: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन बचाने की अपील करने के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव समेत कई मंत्रियों ने अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या को घटा दिया है, लेकिन अब भी कई नेता शक्ति प्रदर्शन करने से बाज नहीं आ रहे हैं। ईंधन बचत की अपील को ना मानने वालों पर भाजपा और सरकार ने कार्रवाई भी की है, लेकिन इस कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं कि जुर्म एक तो सजा अलग-अलग क्यों?

दरअसल भिंड भाजपा किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष सज्जन सिंह यादव द्वारा 50 गाड़ियों का काफिला निकालने को लेकर उनकी नियुक्ति निरस्त कर दी गई, जबकि उज्जैन से 200 गाड़ियों का काफिला लेकर भोपाल पहुंचने वाले मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम के नवनियुक्त अध्यक्ष सौभाग्य सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

50 गाड़ियों का काफिला निकाला, नियुक्ति निरस्त

दरअसल भिंड भाजपा किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष सज्जन सिंह यादव ने ग्वालियर से भिंड तक 50 गाड़ियों के साथ शक्ति प्रदर्शन किया था। इस मामले ने मीडिया में सुर्खियां बटोरीं और मामला आलाकमान तक पहुंच गया। इसके बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निर्देश पर सज्जन की नियुक्ति निरस्त कर दी गई है। पार्टी ने सज्जन के काफिले को पीएम मोदी की अपील की अवहेलना बताते हुए उनकी नियुक्ति निरस्त कर दी।

200 गाड़ियों का काफिला निकाला

इधर मप्र पाठ्य पुस्तक निगम के नवनियुक्त अध्यक्ष सौभाग्य सिंह पदभार ग्रहण करने के लिए उज्जैन से 200 गाड़ियों का काफिला लेकर भोपाल पहुंचे थे। उनके इस काफिले से उज्जैन से लेकर भोपाल तक कई जगहों पर जाम की स्थिति बन गई और लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा था। सौभाग्य सिंह के काफिले की खबर नेशनल मीडिया तक छाई रही थी।

सौभाग्य को कारण बताओ नोटिस

मामला सामने आने के बाद एक्शन में आए मुख्यमंत्री कार्यालय ने सौभाग्य सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही लिखित स्पष्टीकरण मिलने और अंतिम फैसला ना होने तक उनके सभी अधिकारों और दायित्वों पर रोक लगा दी गई है।

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अलग-अलग कार्रवाई क्यों?

अब सवाल ये है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मोहन यादव की अपील को दरकिनार करते हुए सज्जन ने 50 गाड़ियों का काफिला निकाला तो उनकी नियुक्ति रद्द कर दी गई, जबकि 200 गाड़ियों के साथ शक्ति प्रदर्शन करने वाले सौभाग्य सिंह को सिर्फ कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। दोनों मामले एक ही तरह के हैं, लेकिन कार्रवाई अलग-अलग क्यों हुई?

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