

भोपाल के SC कन्या छात्रावास में अव्यवस्थाओं पर छात्राओं का प्रदर्शन।
खाने में कीड़े, गंदगी और सुरक्षा में लापरवाही के आरोप।
छात्रावास की दीवार में 5–6 फीट का छेद, बाहरी लोगों के प्रवेश का खतरा।
प्रदर्शन के दौरान गेट पर अंदर से ताला लगाया, वार्डन ने भी नहीं सुनी बात।
Bhopal SC Girls Hostel Food Complaint: राजधानी भोपाल के पंचशील नगर स्थित अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास में अव्यवस्थाओं को लेकर छात्राओं का आक्रोश सामने आया है। खाने में कीड़े निकलने, साफ-सफाई की कमी और सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही के आरोप लगाते हुए छात्राओं ने छात्रावास के बाहर प्रदर्शन किया। छात्राओं का कहना है कि वे करीब चार साल से इन समस्याओं का सामना कर रही हैं, लेकिन वार्डन से लेकर कलेक्टर तक शिकायत करने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।
प्रदर्शन के दौरान छात्राएं काफी देर तक तेज धूप में छात्रावास के गेट के बाहर बैठी रहीं। छात्राओं के मुताबिक, वे बाहर बैठकर नारे लगाती रहीं और अपनी मांगों को लेकर विरोध जताती रहीं। आरोप है कि इस दौरान छात्रावास प्रबंधन ने अंदर से गेट पर ताला जड़ दिया। छात्राओं ने वार्डन मनीषा चौधरी पर भी उनकी बात नहीं सुनने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि जब वे अपनी समस्याएं बताने और समाधान की मांग करने पहुंचती हैं, तो उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया जाता।
छात्रावास में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर छात्राओं ने गंभीर शिकायतें की हैं। उनका आरोप है कि खाने में कीड़े निकलते हैं और भोजन की गुणवत्ता ठीक नहीं है। छात्राओं का कहना है कि छात्रावास में रहने वाली लड़कियों को स्वच्छ और पौष्टिक भोजन मिलना चाहिए, लेकिन उन्हें लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदर्शन कर रही छात्राओं का कहना है कि छात्रावास में अव्यवस्थाओं की समस्या नई नहीं है। वे करीब चार साल से परेशानियों का सामना कर रही हैं। छात्राओं के मुताबिक, इस संबंध में कई बार शिकायतें की गईं और वार्डन से लेकर कलेक्टर तक आवेदन दिए गए, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ।
छात्रावास की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी छात्राओं ने चिंता जताई है। उनके मुताबिक, छात्रावास की दीवार के एक कोने में करीब 5 से 6 फीट का बड़ा छेद है, जिससे बाहरी लोगों के परिसर में प्रवेश करने का खतरा बना रहता है।
छात्राओं ने दावा किया कि कुछ साल पहले इसी छेद के रास्ते लड़के छात्रावास के अंदर घुस आए थे। इसके बावजूद दीवार की मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए। छात्राओं का कहना है कि छात्रावास में रहने वाली लड़कियों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए और ऐसी खामी को तत्काल दूर किया जाना चाहिए।
अपनी मांगों को लेकर छात्राएं काफी देर तक छात्रावास के गेट के बाहर बैठी रहीं। तेज धूप के बीच छात्राओं ने नारेबाजी करते हुए विरोध जताया। छात्राओं का आरोप है कि उनकी समस्याएं सुनने और बातचीत करने के बजाय प्रबंधन ने अंदर से गेट पर ताला लगा दिया। छात्राओं ने वार्डन मनीषा चौधरी भी उनकी बात सुनने को तैयार नहीं होने का आरोप लगाया। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर वार्डन और छात्रावास प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
पंचशील नगर के अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास में भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई, बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा को लेकर सामने आई शिकायतों ने प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। छात्राओं की मांग है कि उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए, भोजन की गुणवत्ता की जांच हो, दीवार के छेद को बंद कराया जाए और छात्रावास की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए।
अब देखना होगा कि संबंधित विभाग और जिला प्रशासन छात्राओं की शिकायतों पर कब संज्ञान लेते हैं और व्यवस्थाओं में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है—जब छात्राएं चार साल से परेशानी झेलने और बार-बार शिकायत करने की बात कह रही हैं, तो उनकी आवाज सुनने के लिए जिम्मेदार अधिकारी कब आगे आएंगे?