भोज वेटलैंड पर NGT के कड़े तेवर: अवैध निर्माण हटाने के लिए 3 महीने की मोहलत, लापरवाही करने पर होगी कार्रवाई

NGT Bhopal Order : भोपाल के भोज वेटलैंड पर NGT ने सख्त रुख अपनाते हुए अवैध निर्माण तीन महीने में हटाने के निर्देश दिए। FTL के वैज्ञानिक निर्धारण के लिए 7 सदस्यीय तकनीकी समिति गठित की गई।
NGT Issues Strict Directions For Protection of Bhoj Wetland
NGT ने दिए अतिक्रमण हटाने के निर्देशफोटो सोर्स- AI
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Bhoj Wetland NGT Order : भोपाल के भोज वेटलैंड के संरक्षण, अवैध अतिक्रमण और प्रदूषण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की सेंट्रल जोन बेंच ने राज्य सरकार और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। 31 अगस्त 2026 को हुई सुनवाई में NGT ने भोज वेटलैंड की स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि यह अपने इतिहास के सबसे बड़े खतरों का सामना कर रहा है। अधिकरण ने टिप्पणी की कि संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पूर्ण अवहेलना के समान है।

NGT ने भोज वेटलैंड के आसपास अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आदेश के अनुसार वेटलैंड, उसके बफर जोन और प्रभाव क्षेत्र में मौजूद अवैध निर्माणों को कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए तीन महीने के भीतर हटाना होगा। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक देरी, अधिकारियों की लापरवाही या निर्माण पर खर्च की गई राशि किसी भी अवैध निर्माण को वैध नहीं बना सकती।

FTL/HFL से 50 और 250 मीटर तक निर्माण पर रोक

अधिकरण ने भोज वेटलैंड के आसपास निर्माण को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रतिबंध तय किए हैं। आदेश के अनुसार शहरी क्षेत्र की ओर वेटलैंड के FTL/HFL से 50 मीटर के भीतर और ग्रामीण क्षेत्र की ओर 250 मीटर के भीतर किसी भी प्रकार का अस्थायी या स्थायी निर्माण अनुमति योग्य नहीं होगा। यह प्रतिबंध Wetlands (Conservation and Management) Rules, 2017 के लागू होने के समय से प्रभावी माना गया है।

लापरवाह अधिकारियों की तय होगी व्यक्तिगत जिम्मेदारी

NGT ने सार्वजनिक भूमि और वेटलैंड पर अवैध कब्जे रोकने में विफल अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने पर विशेष जोर दिया है। नगरीय विकास विभाग के प्रमुख सचिव को ऐसे नगरपालिका अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए हैं, जिन्होंने अवैध निर्माण और अतिक्रमण रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई नहीं की। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है।

FTL विवाद खत्म करने के लिए 7 सदस्यीय तकनीकी समिति

भोज वेटलैंड के फुल टैंक लेवल यानी FTL को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद के वैज्ञानिक समाधान के लिए NGT ने सात सदस्यीय तकनीकी समिति गठित की है। समिति जियो-टैगिंग, सैटेलाइट इमेजरी, ग्राउंड ट्रुथिंग, रिमोट सेंसिंग और ड्रोन सर्वे के माध्यम से वैज्ञानिक परीक्षण करेगी। मध्य प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को समिति की रिपोर्ट के समन्वय के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है।

बिना ट्रीटमेंट सीवेज और प्रदूषित पानी रोकने के निर्देश

अधिकरण ने भोज वेटलैंड में अनट्रीटेड सीवेज, अपशिष्ट और प्रदूषित पानी के प्रवेश पर भी तत्काल प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। नगर निगम और संबंधित कलेक्टरों को Wetlands Rules, 2017 के प्रावधानों का सख्ती से पालन कराने को कहा गया है। वेटलैंड में कचरा, मिट्टी, रेत और औद्योगिक या घरेलू प्रदूषित जल छोड़ने पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

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पूरे मध्य प्रदेश के छोटे जलस्रोतों को लेकर भी बड़ा आदेश

NGT ने सिर्फ भोज वेटलैंड तक अपने निर्देश सीमित नहीं रखे हैं। मध्य प्रदेश में 2.25 हेक्टेयर से छोटे वेटलैंड्स, तालाब और जल निकायों की पहचान, सीमांकन और संरक्षण को लेकर भी राज्य प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं। लगभग 5.55 लाख छोटे जल निकायों के संबंध में निर्धारित समयसीमा में रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है। अब इस आदेश के बाद प्रशासन के सामने भोज वेटलैंड को अतिक्रमण, अवैध निर्माण और प्रदूषण से बचाने की बड़ी चुनौती है।

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