MP में राजस्व विभाग पर उठे सवाल, कार्यप्रणाली को लेकर सांसद आलोक शर्मा ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखा पत्र
MP Revenue Department Issues: भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली, देरी और पटवारियों की तैनाती को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
- Reported By: सुधीर दंडोतिया | Edited By: प्रीतेश जैन
आलोक शर्मा और उनका लेटर (फोटो सोर्स- नवभारत)
Alok Sharma Revenue Department Letter: राजधानी भोपाल में राजस्व विभाग के कामकाज को लेकर उठ रही शिकायतों पर सांसद आलोक शर्मा ने गंभीर रुख अपनाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर विभाग में चल रही कथित अनियमितताओं और कामकाज में देरी पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
सांसद आलोक शर्मा ने अपने पत्र में कहा है कि जिले में भूमि सीमांकन, नामांतरण और नक्शा सुधार जैसे महत्वपूर्ण राजस्व कार्यों में आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों और भू-स्वामियों को अपने कार्यों के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे जनता में नाराजगी बढ़ रही है।
जानबूझकर की जा रही देरी
उन्होंने आरोप लगाया है कि राजस्व विभाग में कई स्तरों पर कामकाज की गति बेहद धीमी है और कई मामलों में जानबूझकर देरी की जा रही है। इसके कारण लोगों के जरूरी काम समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं और वे मानसिक व आर्थिक रूप से परेशान हो रहे हैं। सांसद आलोक शर्मा ने यह भी गंभीर आरोप लगाया है कि कुछ ऐसे पटवारी, जिनके खिलाफ पहले शिकायतें दर्ज थीं और जिन्हें पूर्व में हटाया गया था, उनकी फिर से उसी क्षेत्र में तैनाती कर दी गई है। इसे उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठाने वाला कदम बताया है।
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सिस्टम पर कम हो रहा जनता का भरोसा
इसके अलावा, पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ कर्मचारी लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं, जिससे कार्यप्रणाली में जड़ता आ गई है और आम जनता का सिस्टम पर भरोसा कमजोर हो रहा है। आलोक शर्मा ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि जहां भी अनियमितता या लापरवाही सामने आए, वहां संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि शासन-प्रशासन की विश्वसनीयता बनी रहे और जनता को राहत मिल सके।
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राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
सांसद के इस पत्र के बाद राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा के केंद्र में आ गई है। अब देखना होगा कि उनकी इस शिकायत के बाद सरकार द्वारा क्या कार्रवाई की जाती है?
