योग शिक्षा पर सवाल: मध्य प्रदेश में डिग्री तो मिल रही, लेकिन रोजगार नहीं, खाली रह गईं 47% सीटें

Unemployment in Yoga Sector: मध्य प्रदेश के विश्वविद्यालयों में योग कोर्स की लगभग 47% सीटें खाली रह गईं। रोजगार की कमी और स्थायी नौकरी न होने से छात्रों की रुचि घट रही है, जो चिंता का विषय बन गया है।
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कॉन्सेप्ट इमेज (सोर्स- नवभारत)
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MP Yoga Course Seats Empty: मध्य प्रदेश में योग शिक्षा को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। जहां एक ओर योग को स्वास्थ्य और जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा मानकर इसे शिक्षा प्रणाली में तेजी से शामिल किया गया है, वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालयों में योग पाठ्यक्रमों की आधी से ज्यादा सीटें खाली रह जाना रोजगार की स्थिति पर सवाल खड़े कर रहा है।

राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के प्रमुख सरकारी विश्वविद्यालयों में योग कोर्सेज में कुल 330 सीटों में से केवल 175 सीटों पर ही दाखिला हो सका, जबकि 155 सीटें खाली रह गईं। यानी लगभग 47 प्रतिशत सीटों पर छात्रों ने रुचि नहीं दिखाई। सबसे गंभीर स्थिति अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय की रही, जहां 100 सीटों में से केवल 23 छात्रों ने ही प्रवेश लिया।

माखनलाल यूनिवर्सिटी का भी यही हाल

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय और सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में भी योग से जुड़े पीजी डिप्लोमा कोर्सों में अपेक्षित दाखिले नहीं हो पाए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति युवाओं की बदलती प्राथमिकताओं और रोजगार को लेकर बढ़ती चिंता को दर्शाती है।

रोजगार के अवसर सीमित

योग शिक्षा को लेकर छात्रों की उदासीनता के पीछे सबसे बड़ा कारण रोजगार की अनिश्चितता मानी जा रही है। छात्रों का कहना है कि सरकारी क्षेत्र में योग शिक्षकों के लिए स्थायी पदों की कमी है। जहां भी अवसर मिलते हैं, वहां अक्सर संविदा या अतिथि शिक्षक के रूप में ही नियुक्ति होती है, जिसमें न तो स्थायित्व होता है और न ही बेहतर वेतन सुरक्षा। मानदेय की कम दर भी एक बड़ी समस्या है। छात्रों के अनुसार, योग में डिग्री मिलने के बाद भी जब रोजगार की गारंटी नहीं मिलती, तो इस क्षेत्र में करियर बनाना जोखिम भरा लगता है।

प्राइवेट सेक्टर में इनकम अच्छी, लेकिन स्थिरता की कमी

हालांकि, प्राइवेट सेक्टर में योग प्रशिक्षकों की मांग बढ़ रही है। फिटनेस सेंटर, योग स्टूडियो और कॉरपोरेट वेलनेस सेक्टर में योग ट्रेनर ₹20,000 से ₹50,000 तक मासिक आय कमा रहे हैं, लेकिन स्थिरता की कमी के कारण अधिकतर छात्र इस क्षेत्र में आगे बढ़ने से हिचकिचा रहे हैं।

रोजगार बना सबसे बड़ा सवाल

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मध्य प्रदेश सरकार योग शिक्षा को रोजगार से जोड़कर ठोस नीति बनाती है, तो यह क्षेत्र युवाओं के लिए एक मजबूत करियर विकल्प बन सकता है। फिलहाल स्थिति यह है कि डिग्री मिल रही है, लेकिन नौकरी की गारंटी अब भी सबसे बड़ा सवाल बनी हुई है।

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