MP प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष पद को लेकर विवाद, अजय दुबे ने की IAS अनिरुद्ध मुखर्जी पर कार्रवाई की मांग

Ajay Dubey complaint against IAS Anirudh Mukherjee : MP प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष पद को लेकर IAS अनिरुद्ध मुखर्जी पर आरोप लगे हैं। अजय दुबे ने एफआईआर, निलंबन और लोकायुक्त जांच की मांग की है।
Anirudh Mukherjee MPPCB Controversy
IAS अनिरुद्ध मुखर्जी और अजय दुबेफोटो सोर्स- सोशल मीडिया
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Highlights:

  • पर्यावरण कार्यकर्ता अजय दुबे ने IAS अनिरुद्ध मुखर्जी के खिलाफ ज्ञापन सौंपा।

  • MP प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष पद पर अनधिकृत रूप से काम करने का आरोप।

  • 17 जून के GAD आदेश में अध्यक्ष पद का प्रभार नहीं होने का दावा।

  • एफआईआर, निलंबन और लोकायुक्त जांच की मांग।

Anirudh Mukherjee MPPCB chairman appointment controversy : मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष पद को लेकर नया विवाद सामने आया है। पर्यावरण एवं वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अनिरुद्ध मुखर्जी पर बिना वैधानिक नियुक्ति के बोर्ड अध्यक्ष का पद संभालने का आरोप लगाया है।

इस मामले में दुबे ने मुख्यमंत्री, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री, कैबिनेट सचिव और प्रदेश के मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपकर एफआईआर, गिरफ्तारी, निलंबन और लोकायुक्त जांच की मांग की है।

अतिरिक्त प्रभार के आदेश में अध्यक्ष पद शामिल नहीं होने का दावा

अजय दुबे के ज्ञापन के मुताबिक, सामान्य प्रशासन विभाग ने 17 जून 2026 को अनिरुद्ध मुखर्जी को अपर मुख्य सचिव (पर्यावरण), पर्यावरण आयुक्त और ईपीसीओ के महानिदेशक का अतिरिक्त प्रभार दिया था। दुबे का दावा है कि इस आदेश में मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष पद का उल्लेख नहीं था। इसके बावजूद मुखर्जी ने 6 जुलाई 2026 को स्वयं को बोर्ड का अध्यक्ष घोषित कर दिया।

मुख्यमंत्री के सामने भेजा गया प्रस्ताव भी निरस्त होने का आरोप

ज्ञापन में दावा किया गया है कि 6 जुलाई को मुखर्जी ने स्वयं को बोर्ड अध्यक्ष बनाए जाने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के पास भेजा था। अजय दुबे के अनुसार, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नियमों का उल्लंघन मानते हुए इस प्रस्ताव को निरस्त कर दिया था। इसके बावजूद अधिकारी द्वारा अध्यक्ष के रूप में काम जारी रखने का आरोप लगाया है।

पांच महीने के कार्यकाल में फैसले लेने पर सवाल

अजय दुबे ने आरोप लगाया है कि कथित तौर पर पांच महीने तक अनधिकृत रूप से अध्यक्ष पद पर रहते हुए औद्योगिक इकाइयों को पर्यावरण संबंधी सम्मतियां और अनुमतियां जारी की गईं। इसके अलावा पदोन्नति और तबादलों से जुड़े फैसले भी लिए गए। उन्होंने इस अवधि में लिए गए सभी निर्णयों की वैधानिकता की जांच कराने की मांग की है।

एफआईआर, निलंबन और लोकायुक्त जांच की मांग

ज्ञापन में अनिरुद्ध मुखर्जी के खिलाफ कथित धोखाधड़ी, कूटरचित आचरण और पद के दुरुपयोग के आरोपों में एफआईआर दर्ज करने और गिरफ्तारी की मांग की गई है। साथ ही उन्हें निलंबित या बर्खास्त करने की मांग भी रखी गई है। दुबे ने पांच महीने के कार्यकाल में हुए वित्तीय और प्रशासनिक फैसलों की लोकायुक्त से जांच कराने की मांग की है।

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सभी आदेशों की वैधानिकता जांचने की मांग

अजय दुबे ने कथित अनधिकृत कार्यकाल के दौरान जारी पर्यावरणीय सम्मतियों, अनुमतियों, पदोन्नतियों और तबादलों की समीक्षा कर उन्हें निरस्त करने की मांग की है। अब इस मामले में संबंधित विभागों और सरकार के रुख पर नजर रहेगी। ज्ञापन में लगाए गए आरोपों पर आईएएस अधिकारी अनिरुद्ध मुखर्जी या शासन की तरफ से कोई बयान सामने नहीं आया है।