कुत्तों का वायरस 'CDV' बना बाघिन की मौत की वजह, कान्हा में हाई-अलर्ट; 2018 में भी हुई थी 34 शेरों की मौत

Madhya Pradesh News: कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघिन और उसके चार शावकों की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। बता दें कि इन बाघों की मौत किसी शिकार या हमले से नहीं बल्कि CDV वायरस की वजह से हुई थी।
Kanha Tiger Reserve Tigress T 141 Death Reason Canine Distemper Virus Alert
सीडीवी वायरस की वजह से हुई बाघिन की मौत (सोर्स- सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Kanha Tiger Reserve Tiger Death Reason: कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघिन टी-141 और उसके चार शावकों की लगातार हुई मौतों के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि इन बाघों की मौत किसी शिकार या हमले से नहीं, बल्कि ‘केनाइन डिस्टेंपर वायरस’ (CDV) नाम की खतरनाक बीमारी के कारण हुई।

इस खुलासे के बाद पार्क प्रबंधन और वन्यजीव विशेषज्ञों में चिंता और हड़कंप की स्थिति है। वन विभाग अब इस वायरस के संभावित खतरे और उसके फैलाव को लेकर सतर्क हो गया है।

सीडीवी वायरस की हुई पुष्टि

बता दें कि जब बाघिन और उसके शावकों की मौत हुई थी, तब ऐसा माना जा रहा था कि बाघ सीडीवी वायरस के शिकार हो गए थे लेकिन अब इस बात की पुष्टि हो चुकी है। दरअसल, कान्हा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रविंद्र मणि त्रिपाठी ने बताया कि मृत बाघों के सैंपल जांच के लिए जबलपुर वेटरिनरी साइंस कॉलेज भेजे गए थे, जहां ‘केनाइन डिस्टेंपर वायरस’ (CDV) की पुष्टि हुई है।

भूख खत्म कर देता है यह वायरस

जानकारी के अनुसार यह वायरस जानवरों की भूख खत्म कर देता है और निमोनिया जैसी गंभीर स्थिति पैदा करता है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में शावकों के पेट पूरी तरह खाली पाए गए, जिससे संकेत मिलता है कि वे लंबे समय तक भूखे रहे थे। वन विभाग का अनुमान है कि यह संक्रमण आसपास के गांवों में रहने वाले संक्रमित कुत्तों के जरिए जंगल तक पहुंचा हो सकता है।

वायरस की पुष्टि के बाद हाई-अलर्ट

  • व्यापक टीकाकरण अभियान: संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पार्क के आसपास के 8 गांवों में कुत्तों और मवेशियों का वैक्सीनेशन शुरू किया गया है। अब तक चिह्नित 103 कुत्तों में से 94 का टीकाकरण पूरा हो चुका है।

  • सघन निगरानी और घेराबंदी: बाघों के शव मिलने वाले स्थान के 5 किलोमीटर के दायरे को पूरी तरह डिसइन्फेक्ट (विषाणु मुक्त) कर दिया गया है। सुरक्षा के लिहाज से यहाँ 40 ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं और हाथी दलों द्वारा लगातार गश्त की जा रही है।

  • पर्यटकों के लिए सख्त प्रोटोकॉल: सभी होटल और रिजॉर्ट संचालकों के लिए कड़ी गाइडलाइन जारी की गई है। पार्क के तीनों प्रवेश द्वारों पर डिसइन्फेक्टेंट टैंक बनाए गए हैं; अब हर पर्यटक वाहन को इन टैंकों से गुजरकर सैनिटाइज होने के बाद ही जंगल में प्रवेश की अनुमति दी जा रही है।

6 साल पहले इसी वायरस से हुई थी 34 शेरों की मौत

‘केनाइन डिस्टेंपर वायरस’ (CDV) कितना खतरनाक है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2018 में गिर नेशनल पार्क में इसी वायरस के संक्रमण के चलते 34 शेरों की मौत हो गई थी। उस घटना ने वन्यजीव संरक्षण को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी थी।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com