हनुमानजी के प्रति 11 दिनों की आपकी ‘यह’ आराधना पूरी करेंगी आपकी मनोकामनाएं
- Written By: नवभारत डेस्क
File Photo
सीमा कुमारी
नई दिल्ली: सनातन धर्म में हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार का दिन सर्वश्रेष्ठ माना गया है। ज्योतिषियों के अनुसार, इस दिन किए गए कुछ विशेष उपाय व्यक्ति के जीवन से दुखों का अंत करते हैं। इसके अलावा, लंबे समय से अधूरी मनोकामनाएं भी बजरंगबली पूर्ण करते हैं। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ पढ़ने का विशेष महत्व बताया गया हैं।
कहते हैं, यदि आपकी भी ऐसी ही कोई मनोकामना है, जो आप पूरी करना चाहते हैं, तो हनुमान चालीसा का पाठ विधिपूर्वक करने से विशेष लाभ होता है और व्यक्ति को शुभ फलों की प्राप्ति होती हैं। आइए जानें इन उपायों के बारे में-
सम्बंधित ख़बरें
Hanuman Temples Of India: भारत के 5 प्राचीन और चमत्कारिक हनुमान मंदिर, जो 1000 साल से भी अधिक पुराने हैं
Hanuman Chalisa: रोज हनुमान चालीसा का पाठ करने से मिलते हैं ये 5 दिव्य फायदे, भय और नकारात्मकता का होगा नाश
Hanuman Chalisa: हनुमान चालीसा के पाठ से इन लोगों का हो जाएगा बेड़ा पार! जीवन के कष्टों से मिलेगी मुक्ति
Hanuman Chalisa Benefits: रोज हनुमान चालीसा का पाठ करने से मिल सकते हैं ये 5 आध्यात्मिक लाभ, मन होगा शांत
ज्योतिष-शास्त्र के अनुसार, मंगलवार के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नानादि से निवृत्त हो हनुमान जी की तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद एक थाली में फल और फूल की स्थापना करें। इसके बाद अपनी अधूरी मनोकामना या इच्छा हाथ जोड़कर हनुमान जी के आगे दोहराएं। इसके बाद 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें।
इस उपाय की शुरुआत मंगलवार के दिन से करना उत्तम रहता है। इसके बाद हनुमान जी की पूजा करें और फल का भोग लगाएं। इसके साथ ही इस बात का ध्यान रखें कि हनुमान चालीसा की अंतिम चौपाई में संत तुलसीदास की जगह अपना नाम लें। हनुमान जी को तुलसी बेहद प्रिय है, इसीलिए हर मंगलवार उनके चरणों में तुलसी के पत्ते पर सिंदूर से श्री राम लिखकर अर्पित करें। इस उपाय से बजरंग बली जरूर प्रसन्न होंगे और सभी दुखों को हर लेंगे। इस दिन हनुमान जी को बूंदी के लड्डू का भोग जरूर लगाना चाहिए। इससे मनचाही इच्छा हनुमान जी अवश्य पूरी करते हैं।
मंत्र
ॐ हं हनुमते नम:
अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥
ॐ अंजनिसुताय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि तन्नो मारुति प्रचोदयात्।
